Exclusive Big Breaking : खनन विभाग की टीम पर हमला करने के आरोप में 6 नामजद और 150 अज्ञात लोगों पर मुकदमा पंजीकृत
उत्तर प्रदेश हो या फिर उत्तराखंड खनन माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद है कि किसी भी विभाग के अधिकारियों के साथ अभद्रता मारपीट जैसी घटनाओं को अंजाम देने से नहीं चूक रहे है, देर रात ठाकुरद्वारा में भी खनन माफियाओं ने खनन विभाग की टीम से अभद्रता की जिस पर एसडीएम व खनन टीम पर हमले के आरोपियों पर बड़ी कार्यवाही की गई है।खनन इंस्पेक्टर की शिक़ायत पर कार्यवाही करते हुए कोतवाली पुलिस ने 6 नामजद सहित 150 अज्ञात लोगों के विरुद्ध गम्भीर धाराओं में मुक़दमा पंजिकृत किया है।
मुरादाबाद स्थित आशियाना कालौनी फेज 2 निवासी खनन इंस्पेक्टर अशोक कुमार ने पुलिस को दिए शिकायती पत्र में कहा है कि वह अपनी टीम के साथ 13 सितंबर की रात्रि लगभग 8 बजे ठाकुरद्वारा-काशीपुर मार्ग पर अवैध खनन के सम्बंध में चैकिंग कर रहे थे। इस दौरान खनन के चार वाहन रोकने पर पता चला कि उनमें बिना रॉयल्टी जमा किये राजस्व को भारी नुक़सान पहुँचकर खनन भरकर लाया जा रहा है,जिसकी सूचना स्थानीय एसडीएम परमानन्द सिँह को भी दी गयी,जिसके बाद एसडीएम भी मौक़े पर पहुँच गए,आरोप है कि इस दौरान रईस प्रधान निवासी फोलादपुर,वसीम निवासी रतुपुरा,रिज़वान निवासी ठाकुरद्वारा, इरफ़ान निवासी शरबतनगर,दिलशाद निवासी कमालपुरी लगभग 150 अज्ञात लोगों को साथ लेकर पहुँचे और जिन वाहनों पर टीम द्वारा कार्यवाही करते हुए उन्हें मंडी ले जाया जा रहा था मारपीट करते हुए आरोपियों ने उन्हें छुड़ा लिया और वाहन लेकर जा रहे प्राइवेट चालक सचिन पुत्र दयाल सिँह निवासी मलीपुर को घायल कर दिया।तहरीर में सरकारी कार्य मे बाधा डालने,मारपीट के लिए भीड़ को उकसाने सहित तमाम गम्भीर धाराओं में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ़ मुक़दमा पंजिकृत कर लिया है।
बड़ा सवाल-आखिर बन विभाग की चौकी से कैसे गुज़रते हैं बिना रॉयल्टी के वाहन
क्षेत्रभर में बड़े पैमाने पर खनन माफिया खनन के अवैध कारोबार को अंजाम देकर राजस्व को प्रतिमाह लाखो का चुना लगाते हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन कार्यवाही की ज़हमत नही उठा पाता,स्थानीय प्रशासन के मौन रहने का कारण क्या है इसको आसानी से समझा जा सकता है।खनन माफियाओं के इस दुसहसिक कृत्य ने यह बात पूरी तरह से उजागर कर दी है कि उनके हौंसले कितने बुलन्द हैं और वह किस हद तक जा सकते हैं।
टीम पर हमले की वजह कहीं राजनीतिक संरक्षण तो नही
भला ऐसा कैसे हो सकता है कि अधिकारियों के साथ इस तरह की वारदात को अंजाम देने वाले खनन माफियाओं को इसके अंजाम का न पता हो,उसके बावुजूद भी उनका दुःसाहस कहीं राजनीतिक संरक्षण तो नही है यह सोचने वाली बात है।
