वनाग्नि की भीषण आपदा से पहले ‘जंग’ की तैयारी: क्या 18 फरवरी का यह महा-अभ्यास बचा पाएगा उत्तराखंड के बेशकीमती जंगल?
अज़हर मलिक
उत्तराखंड के जंगलों पर मंडराते वनाग्नि के खतरे और ‘फायर सीजन’ की आहट के बीच प्रशासन ने एक ऐसी बड़ी घेराबंदी शुरू कर दी है, जिसकी गंभीरता को देखकर लगता है कि इस बार आग से निपटने की रणनीति बिल्कुल अलग होने वाली है। 18 फरवरी 2026 को होने वाले एक बेहद खास ‘मॉक अभ्यास’ को लेकर कलेक्ट्रेट के आपदा प्रबंधन सभागार में जब अधिकारियों की फौज जुटी, तो माहौल में एक अलग ही सस्पेंस और तत्परता नजर आई। जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया के कड़े तेवरों और तैयारियों की बारीकियों को देखकर यह साफ हो गया कि इस बार वनों की सुरक्षा के लिए केवल कागजी घोड़े नहीं दौड़ेंगे, बल्कि धरातल पर एक मजबूत ‘रिस्पांस सिस्टम’ को परखने के लिए एक निर्णायक जंग की रिहर्सल होने जा रही है।
जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने बैठक के दौरान स्पष्ट चेतावनी दी कि वनाग्नि प्रबंधन और नियंत्रण की असली परीक्षा आग लगने से पहले की तैयारियों में छिपी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 18 फरवरी को प्रस्तावित इस मॉक अभ्यास का मुख्य उद्देश्य अपने तंत्र की क्षमता का आंकलन करना और यह सुनिश्चित करना है कि क्या हमारे संसाधन, विभाग और समुदाय किसी भी आपात स्थिति के लिए पूरी तरह सुदृढ़ हैं। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को दो टूक लहजे में समझाया कि इस अभ्यास के माध्यम से न केवल अर्न्तविभागीय समन्वय को सुधारा जाएगा, बल्कि आपदा के समय काम आने वाले आधुनिक उपकरणों का भी कड़ा परीक्षण किया जाएगा ताकि ऐन वक्त पर कोई तकनीकी चूक न रह जाए।
प्रशासन की यह सक्रियता केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जिलाधिकारी ने डीएफओ और उप जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे परगना स्तर पर भी इसी तरह के मॉक अभ्यास आयोजित करें ताकि वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए मैदानी स्तर पर हर कर्मचारी और अधिकारी सजग रहे। जंगलों से सटे गाँवों को इस अभियान का अहम हिस्सा बनाने के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे ग्रामीणों को जागरूक करें और उनकी टीमें तैयार रखें। जिलाधिकारी ने आम जनता से भी मार्मिक अपील की है कि यदि कहीं भी आग की घटना दिखे, तो उसे अपनी जिम्मेदारी समझते हुए तत्काल आपदा कंट्रोल रूम, पुलिस या वन विभाग को सूचित करें, ताकि वक्त रहते ‘देवभूमि’ की प्राकृतिक संपदा को राख होने से बचाया जा सके।