आधी रात का सन्नाटा, नहर का किनारा और बेशकीमती लकड़ियों का वो ‘काला खेल’ जो एक टॉर्च की रोशनी में दफन हो गया।
रात के सन्नाटे और नहर के ठंडे किनारों के बीच जब दुनिया सो रही थी, तब किलावली के पास कुछ ऐसा हो रहा था जिसकी भनक न तो गांव वालों को थी और न ही उस शख्स को जो अपनी चालाकी पर गुरूर कर बैठा था। तुमड़िया निकासी नहर की लहरों के साथ बहता हुआ रहस्य अचानक एक टॉर्च की रोशनी में बेनकाब हो गया, जहाँ अंधेरे का फायदा उठाकर बेशकीमती कुदरती खजाने को ठिकाने लगाने की एक बड़ी साजिश रची जा रही थी।
तराई पश्चिमी वन प्रभाग की टीम ने 19 फरवरी की रात करीब साढ़े दस बजे गश्त के दौरान उस समय तहलका मचा दिया जब उन्होंने एक संदिग्ध गतिविधि को घेरा, जो पहली नजर में किसी सामान्य मुसाफिर जैसी लग रही थी। लेकिन जैसे ही जांच आगे बढ़ी, सफेदपोश चेहरों के पीछे छिपा तस्करी का काला खेल सामने आ गया। रामनगर के मालधनचौड़ निवासी सुरन्दर उर्फ बंटा, जो अब तक खुद को कानून की नजरों से ओझल मान रहा था, खैर की लकड़ियों के अवैध जखीरे के साथ रंगे हाथों दबोच लिया गया।
दक्षिणी जसपुर रेंज के जांबाज अधिकारियों ने न सिर्फ इस तस्करी के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया, बल्कि सरकारी संपत्ति की लूट की इस कोशिश को पूरी तरह नाकाम कर दिया। टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बरामद खैर के प्रकाष्ठ को पतरामपुर परिसर में सुरक्षित पहुंचाया और आरोपी के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसते हुए उसे सलाखों के पीछे भेजने की तैयारी पूरी कर ली है। यह पूरी कार्रवाई वन क्षेत्राधिकारी महेश सिंह बिष्ट के नेतृत्व में गणेश चन्द्र जोशी, ललित आर्य और तरसेम सिंह जैसे वर्दीधारियों की मुस्तैदी का नतीजा रही, जिन्होंने रात के अंधेरे में भी अपराधियों के मंसूबों को साफ पढ़ लिया।