अपराधियों की शामत या सुरक्षा का चक्रव्यूह? जनपद की सड़कों पर जब अचानक थमीं धड़कनें..
अज़हर मलिक
आधी रात का सन्नाटा हो या शहर की हलचल, जब खाकी वर्दी एक साथ 42 अलग-अलग दिशाओं में कदमताल करने लगे, तो समझ लीजिए कि कुछ बड़ा होने वाला है। शनिवार की ढलती शाम और रविवार की सुबह के बीच जनपद की सीमाओं पर जो मंजर दिखा, उसने आम नागरिक को सुरक्षा का अहसास कराया तो वहीं संदिग्धों के माथे पर पसीना ला दिया। किसी को भनक तक नहीं थी कि एसएसपी अजय गणपति की एक ‘सीक्रेट फाइल’ थानों की मेजों पर पहुँचते ही पूरे जिले को एक अभेद्य किले में तब्दील कर देगी। गली-कूचों से लेकर हाईवे के ढाबों तक, हर उस चेहरे की बारीकी से जांच शुरू हुई जिसने अपनी पहचान को पर्दों में छिपा रखा था।
दरअसल, यह कोई सामान्य गश्त नहीं बल्कि अपराध की कमर तोड़ने के लिए बिछाया गया एक विशाल ‘सत्यापन जाल’ था। एसएसपी के कड़े रुख के बाद 42 पुलिस टीमों ने एक साथ मोर्चा संभाला और जनपद के चप्पे-चप्पे को खंगाल डाला। इस विशेष अभियान के दौरान रुद्रपुर से लेकर खटीमा तक खाकी का सख्त पहरा दिखाई दिया। सबसे बड़ी कार्रवाई रुद्रपुर कोतवाली क्षेत्र में देखने को मिली जहाँ 200 लोगों का रिकॉर्ड खंगाला गया, वहीं खटीमा में 110 और सितारगंज व पंतनगर में 95-95 लोगों का सत्यापन कर पुलिस ने स्पष्ट कर दिया कि बाहरी और संदिग्ध व्यक्तियों के लिए जिले में कोई जगह नहीं है। काशीपुर में 75 और झनकइया में 61 लोगों से पूछताछ कर उनकी कुंडली खंगाली गई।
आंकड़ों की बाजीगरी यहीं नहीं रुकी; सत्यापन के साथ-साथ पुलिस का डंडा उन लोगों पर भी चला जो नियमों को ताक पर रखकर घूम रहे थे। काशीपुर में सबसे ज्यादा 20 चालान काटे गए, जबकि झनकइया में 12 और केलाखेड़ा व रुद्रपुर में 9-9 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। जसपुर, कुंडा, गदरपुर, किच्छा और पुलभट्टा जैसे इलाकों में भी पुलिस ने संदिग्धों को घेरकर उनके दस्तावेजों की जांच की। एसएसपी अजय गणपति के इस ‘ऑपरेशन क्लीन’ ने न केवल अपराधियों में खौफ पैदा किया है, बल्कि उन मकान मालिकों और संचालकों को भी कड़ा संदेश दिया है जो बिना सत्यापन के बाहरी लोगों को पनाह दे रहे हैं। जनपद की पुलिस अब केवल अपराध होने का इंतजार नहीं कर रही, बल्कि अपराध होने की हर गुंजाइश को जड़ से खत्म करने के मिशन पर निकल चुकी है।