मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चला जन-जन की सरकार जन-जन के द्वार अभियान 45 दिनों में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज कर सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया। यह अभियान सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सुशासन की जीवंत मिसाल बनकर उभरा।
सलीम अहमद साहिल
प्रदेशभर में आयोजित 681 शिविरों के माध्यम से 5,33,452 से अधिक नागरिकों तक सीधे प्रशासन की पहुंच सुनिश्चित की गई। इस दौरान 51,053 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 33,755 का मौके पर ही समाधान कर दिया गया। यह आंकड़ा बताता है कि सरकार सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर परिणाम दे रही है।
अभियान के तहत विभिन्न प्रमाणपत्रों के लिए 74,184 आवेदन प्राप्त हुए, जिन पर त्वरित कार्रवाई जारी है। इसके अलावा लगभग तीन लाख लोगों ने अलग-अलग सरकारी सेवाओं का सीधा लाभ उठाया।
मुख्यमंत्री की स्पष्ट सोच रही कि जनता को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, बल्कि सरकार स्वयं उनके द्वार तक पहुंचे। इसी विजन को साकार करते हुए दिसंबर से शुरू हुआ यह अभियान 45 दिनों तक लगातार चला। शुक्रवार 20 फरवरी तक पूरे प्रदेश में शिविरों का आयोजन हुआ। अंतिम दिन भी 11 शिविरों में 8,209 लोगों ने भागीदारी कर प्रशासनिक सेवाओं का लाभ लिया।
यह अभियान उत्तराखंड में सुशासन के नए मॉडल के रूप में स्थापित हुआ है। जहां सरकार जवाबदेह है, प्रशासन सक्रिय है और जनता को त्वरित समाधान मिल रहा है।
अभियान भले ही औपचारिक रूप से सम्पन्न हो गया हो, लेकिन सरकार की जनसेवा की प्रतिबद्धता निरंतर जारी रहेगी। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे आगे भी जनता के बीच जाकर समस्याओं का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करें।
‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ ने यह साबित कर दिया है कि जब नेतृत्व स्पष्ट हो और नीयत साफ हो, तो प्रशासनिक व्यवस्था आमजन के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकती है।