अस्पताल बना ‘अखाड़ा’: संपादक कामरान अली के साथ अभद्रता की खबर, क्या रसूखदारों के दबाव में दब जाएगी सच्चाई, फोन करके आखिर किसने संपादक को बुलाया?
शानू कुमार / ब्यूरो उत्तर प्रदेश
बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद में पत्रकारिता के चौथे स्तंभ पर प्रहार का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ एक चर्चित निजी अस्पताल परिसर में ‘लावा न्यूज’ साप्ताहिक समाचार पत्र के संपादक कामरान अली के साथ कथित तौर पर अभद्रता की कोशिश ने पूरे शहर के प्रशासनिक और पत्रकारिता जगत को हिला कर रख दिया है।
जानकारी के अनुसार संपादक पिछले कुछ समय से कुछ निजी अस्पतालों पर मुखर होकर खबरें लिख रहे थे, वहीं विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार उन्हें गुरुवार शाम एक निजी अस्पताल में समझौते और बातचीत के बहाने बुलाया गया, जहाँ डॉ. फाजिल मंसूरी, डॉ. अनीस बेग, डॉ. शकील आदि की मौजूदगी में समझौते पर बात ना बनने पर अभद्रता का प्रयास भी हुआ, जिसे लेकर अब शहर के गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ‘कलम के सिपाही’ के साथ इतनी बड़ी गरिमापूर्ण चोट होने के बावजूद अब स्वास्थ्य प्रशासन को कोई औपचारिक लिखित शिकायत नहीं दी गई है क्या शिकायत करने में भी कोई अनहोनी का आशंका है?
जिससे यह बड़ा सवाल खड़ा होता है कि आखिर इस संदिग्ध चुप्पी के पीछे किसी बदनामी और अनहोनी का गहरा डर है या फिर पर्दे के पीछे कोई और बड़ा खेल, काम कर रहा है। हालांकि पीड़ित कौन है ये विषय अगले अंक में पढ़िए लेकिन संपादक कामरान अली का दावा है कि वे पत्रकारिता से पीछे नहीं हटेंगे, लेकिन उनका शिकायती पत्र लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पास न जाना कई तरह की सुगबुगाहट पैदा कर रहा है। वहीं इस पूरे प्रकरण पर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि मामला की जानकारी संज्ञान में आई है और यदि कोई लिखित शिकायत आती है तो तुरंत जांच टीम गठित कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी, मगर फिलहाल यह पूरा मामला जांच और खामोशी के बीच उलझा हुआ नजर आ रहा है।