सीएमओ ऑफिस में रोज़ाना नोडल अधिकारी के साथ ड्यूटी! नियमों के खिलाफ कैसे चल रहा है डॉक्टर पुष्पेंद्र का ‘स्पेशल पोस्टिंग गेम’?

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सीएमओ ऑफिस में रोज़ाना नोडल अधिकारी के साथ ड्यूटी! नियमों के खिलाफ कैसे चल रहा है डॉक्टर पुष्पेंद्र का ‘स्पेशल पोस्टिंग गेम’?

स्पेशल रिपोर्ट: शानू कुमार

बरेली : बरेली में स्वास्थ्य विभाग लगातार चर्चा का विषय बना रहता है स्वास्थ्य विभाग से एक नया मामला निकलकर सामने आया है, जिसमें सीएचसी पुलिस लाइन के अधीक्षक डॉ पुष्पेंद्र से जुड़ा है डॉ पुष्पेंद्र को सीएमओ ने सीएचसी के साथ साथ मनमुताबिक काम सौंप दिया है जिसमें नर्सिंग होम्स, हॉस्पिटल पंजीकरण के नोडल अधिकारी डॉ अमित कुमार के साथ ही डॉ पुष्पेंद्र को डॉ अमित कुमार के साथ जिम्मेदारी सौंप दी है। सीएमओ डॉ विश्राम सिंह के मुताबिक नोडल अधिकारी को सहयोग के लिए व्यक्ति की जरूरत थी इसीलिए डॉ पुष्पेंद्र को उनके साथ रख दिया है। अब मामला तब तूल पकड़ता है जब डॉ पुष्पेंद्र पूरे दिन सीएमओ ऑफिस में ड्यूटी निभाते हैं तो सीएचसी पुलिस लाइन में ड्यूटी कौन करता है।

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दरअसल डॉ पुष्पेंद्र की तैनाती सीएचसी पुलिस लाइन बरेली में है लेकिन अब पिछले एक महीने से ज्यादा समय से डॉ पुष्पेंद्र हमेशा पूरे सीएमओ ऑफिस में ड्यूटी बजाते नजर आते हैं, सवाल यह उठता है कि आखिर किन नियमों के तहत डॉ पुष्पेंद्र को नोडल अधिकारी डॉ अमित कुमार के साथ जिम्मेदारी सौंपी गई है, अगर सौंपी गई है तो सीएचसी पुलिस लाइन में डॉ पुष्पेंद्र की जगह कौन ड्यूटी करता है। इस पूरे मामले पर सीएमओ डॉ विश्राम सिंह का कहना है कि उनको सहयोग के तौर पर नोडल अधिकारी के साथ जिम्मेदारी दी गई है।

 

 

नोडल अधिकारी डॉ अमित के साथ मारने जाते हैं निजी संस्थानों पर छापा

 

 

दरअसल डॉ अमित कुमार जब भी फील्ड में निजी संस्थानों पर औचक निरीक्षण करने जाते हैं तो साथ में डॉ पुष्पेंद्र भी जाते है, किन परिस्थितियों में डॉ पुष्पेंद्र जाते हैं इसका जवाब स्वास्थ्य विभाग बेहतर दे सकता है।

 

 

फिलहाल इस पूरे मामले में जो जिम्मेदारी दी गई है वो संदेहास्पद है डॉ पुष्पेंद्र लगातार सीएमओ ऑफिस में ड्यूटी निभा रहे हैं अब देखना होगा कि किम नियमों के तहत यह कार्य किया गया है।

 

 

निजी संस्थानों के संचालकों में कश्मकश….

 

निजी संस्थानों के संचालकों में जबरदस्त कश्मकश है कि आखिर सही नोडल अधिकारी है कौन, और संचालकों को किस्से बात करनी चाहिए फ़िलहाल निजी संचालकों के साथ साथ सीएमओ ऑफिस कार्यालय में चर्चा है आखिर ऐसा हो क्यों रहा है।

 

 

 

स्पेशल डेस्क : ब्यूरो बरेली

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