नोडल अफसर डॉ अमित कुमार और डॉ लईक अहमद की निगरानी फेल, CMO खुद उतरे मैदान में, तीन अस्पतालों में भारी खामियां, फिर सिर्फ नोटिस या होगी कार्रवाई? आला हजरत सर्जिकल एंड ट्रामा सेंटर और अलहिंद हॉस्पिटल में गंभीर गड़बड़ियां उजागर, सिस्टम पर फिर उठे सवाल

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नोडल अफसर डॉ अमित कुमार और डॉ लईक अहमद की निगरानी फेल, CMO खुद उतरे मैदान में, तीन अस्पतालों में भारी खामियां, फिर सिर्फ नोटिस या होगी कार्रवाई? आला हजरत सर्जिकल एंड ट्रामा सेंटर और अलहिंद हॉस्पिटल में गंभीर गड़बड़ियां उजागर, सिस्टम पर फिर उठे सवाल

शानू कुमार ब्यूरो उत्तर प्रदेश 

बरेली: जिले में स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षण में एक नहीं बल्कि तीन अस्पतालों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। CMO डॉ. विश्राम सिंह की टीम ने छापेमारी के दौरान अलहिंद अस्पताल, आला हजरत सर्जिकल एंड ट्रामा सेंटर और एक अन्य निजी अस्पताल में नियमों की खुलेआम अनदेखी पकड़ी। बावजूद इसके, हर बार की तरह इस बार भी कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

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अलहिंद अस्पताल में सबसे बड़ी गड़बड़ी सामने आई, जहां अस्पताल बिना पंजीकरण के संचालित होता मिला। संचालक निरीक्षण के दौरान कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल पहले किसी अन्य भवन में चलता था और अब बिना अनुमति नए स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया।

 

 

वहीं आला हजरत सर्जिकल एंड ट्रामा सेंटर में बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण में भारी लापरवाही मिली। मानकों के विपरीत प्रबंधन पाया गया, जो सीधे तौर पर मरीजों और आसपास के लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ है।

 

 

तीसरे अस्पताल में आयुष्मान योजना के नाम पर खेल सामने आया। जांच में पाया गया कि एक ऐसे मरीज को आईसीयू में भर्ती कर दिया गया, जिसकी हालत आईसीयू के अनुरूप नहीं थी। इससे इलाज के नाम पर फर्जी बिलिंग और वसूली की आशंका मजबूत होती है।

 

 

सीएमओ डॉ विश्राम सिंह ने तीनों अस्पतालों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है और कार्रवाई की चेतावनी दी है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या यह कार्रवाई जमीन पर दिखाई देगी भी या फिर हर बार की तरह नोटिस देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

 

 

गौरतलब है कि इससे पहले भी कई बार ऐसे निरीक्षण किए जा चुके हैं, जिनमें अनियमितताएं उजागर हुईं, लेकिन ठोस कार्रवाई आज तक नजर नहीं आई। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या ये निरीक्षण सिर्फ दिखावे और वसूली का जरिया बनकर रह गए हैं?

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