परिजनों की सुनवाई नहीं, झोलाछाप की खातिरदारी—डिप्टी सीएमओ डॉ अमित कुमार मौके ए हंगामे पर दिखे असहज, गलत इलाज पर हंगामा, कार्रवाई की जगह क्या सौदेबाजी? अफसरों के कमरे में आरोपों से घिरा तथाकथित झोलाछाप!!
शानू कुमार ब्यूरो उत्तर
बरेली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक मरीज के परिजन न्याय की गुहार लेकर पहुंचे और उनकी सुनवाई के बजाय हालात हंगामे में तब्दील हो गए। परिजनों का आरोप है कि गलत इलाज के गंभीर आरोपों में घिरे एक झोलाछाप को बचाने के लिए विभागीय अधिकारी खुलकर सामने आ गए, जबकि पीड़ित परिवार की एक भी बात सुनने को कोई तैयार नहीं था।
परिजनों का कहना है कि वे सबूतों के साथ शिकायत लेकर सीएमओ कार्यालय पहुंचे थे, लेकिन उनकी फरियाद को नजरअंदाज कर झोलाछाप को सीधे अधिकारियों के कमरे में बैठा लिया गया। इससे आहत परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और कार्यालय परिसर में जमकर हंगामा हुआ।
आरोप है कि जिस व्यक्ति पर गलत इलाज का आरोप है, उसे कार्रवाई के घेरे में लेने के बजाय विभागीय संरक्षण दिया जा रहा है। परिजनों का दावा है कि यदि समय रहते सही इलाज मिलता, तो मरीज की हालत इतनी गंभीर न होती।
हंगामे के दौरान हालात उस समय और असहज हो गए, जब झोलाछाप मामलों के नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ डॉ. अमित कुमार भी मौके पर मौजूद थे। अचानक बिगड़े माहौल और परिजनों के तीखे सवालों के बीच अधिकारी हड़बड़ाए नजर आए।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, स्थिति को संभालने के बजाय अधिकारी असहज और सकते में दिखाई दिए।
पीड़ित परिवार का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने में जुटे हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या बरेली में झोलाछापों पर कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है, और क्या सीएमओ कार्यालय खुद कटघरे में खड़ा होने जा रहा है?
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और झोलाछापों के खिलाफ विभागीय इच्छाशक्ति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।