रायबरेली की बेटी का ऐतिहासिक धमाका: 6 मार्च को आए UPSC रिजल्ट ने बदली दिव्या की तकदीर, 418वीं रैंक के साथ जिले में जश्न का माहौल
नरेंद्र त्रिपाठी
रायबरेली। अंधेरी रातों की तपस्या जब सफलता के सूरज के साथ उगती है, तो उसकी चमक पूरे जनपद को रोशन कर देती है। 6 मार्च 2026 की उस तारीख को भला कौन भूल सकता है, जब यूपीएससी 2025 का परिणाम घोषित हुआ और रायबरेली के एक घर में खुशियों का सैलाब उमड़ पड़ा। यह कहानी है उस संघर्ष की, जिसने हार मानना नहीं सीखा और उस जज्बे की, जिसने बाधाओं के हर पहाड़ को चीर कर अपना रास्ता बना लिया। जब आसमान से कामयाबी का सितारा टूटा, तो वह सीधे रायबरेली की बिटिया दिव्या श्रीवास्तव के आंगन में जा गिरा। दिव्या ने देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में 418वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने माता-पिता का मस्तक गर्व से ऊंचा किया है, बल्कि पूरे जिले के मान-सम्मान में चार चांद लगा दिए हैं।
दिव्या की यह जीत कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि वर्षों के धैर्य और अटूट विश्वास का परिणाम है। छठी बार में मिली यह बड़ी सफलता उन तमाम युवाओं के लिए एक मिसाल है जो छोटी असफलताओं से टूट जाते हैं। जैसे ही दिव्या अपनी इस ऐतिहासिक जीत के बाद पहली बार अपनों के बीच पहुंचीं, रायबरेली की सड़कों पर मानो दिवाली मन गई। उनके बाबा रविंद्र कुमार श्रीवास्तव और परिवार के अन्य सदस्यों की आंखों में खुशी के आंसू साफ झलक रहे थे। नगर वासियों ने फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ दिव्या का ऐसा भव्य स्वागत किया कि हर कोई देखता रह गया।
मीडिया से रूबरू होते हुए दिव्या ने बेहद सादगी के साथ अपनी सफलता का मंत्र साझा किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “कर्म करते जाइए, फल आपको अवश्य मिलेगा।” दिव्या की यह उपलब्धि रायबरेली की हर उस तहसील और ग्रामीण क्षेत्र के उभरते हुए नवयुवकों के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बन गई है, जो अपनी आंखों में बड़े सपने संजोए हुए हैं। दिव्या ने साबित कर दिया कि अगर इरादे फौलादी हों, तो रायबरेली की मिट्टी से निकलकर दिल्ली के सत्ता गलियारों तक का सफर तय करना नामुमकिन नहीं है। आज पूरा जनपद अपनी इस लाड़ली की कामयाबी पर नाज कर रहा है।



