डिप्टी सीएमओ या ‘निजी हितों’ के ब्रांड एंबेसडर? डॉ. लईक अहमद की संदेहास्पद भूमिका पर उठ रहे गंभीर सवाल ? इस्वा (ISWA) के ‘मोहरे’ या सरकारी मुलाजिम?
शानू कुमार / ब्यूरो उत्तर प्रदेश
बरेली के डिप्टी सीएमओ डॉ. लईक अहमद अंसारी एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की निष्ठा पर सवालिया निशान लग रहे हैं। साल 2023 में ‘इस्वा’ (ISWA) नामक एक संस्था के गठन के साथ ही विवादों का सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें सरकारी और निजी डॉक्टरों का एक ऐसा गठबंधन तैयार किया गया जो पूरी तरह एक विशेष समुदाय तक सीमित था। इस संस्था में डॉ. लईक अहमद ने सरकारी पद पर रहते हुए कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली, जो सीधे तौर पर सरकारी सेवा नियमावली और प्रोटोकॉल का उल्लंघन था।
वर्तमान में डिप्टी सीएमओ जैसे जिम्मेदार पद पर तैनात होने के बावजूद डॉ. लईक अहमद अंसारी अक्सर निजी अस्पतालों और संस्थाओं के उद्घाटन कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में दिखाई देते हैं, जो उनके पद की गरिमा के विपरीत है। एक तरफ शासन-प्रशासन सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी ओर एक जिम्मेदार अधिकारी का निजी हितों को बढ़ावा देना और विशेष समूहों के साथ उनकी संदेहास्पद सक्रियता विभाग की छवि को धूमिल कर रही है। डॉ फ़िरासत अंसारी और वर्तमान अध्यक्ष अय्यूब अंसारी के साथ उनकी साठगांठ और निजी प्रैक्टिस को प्रमोट करने के आरोपों ने बरेली मंडल में तक चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक अनुशासनहीनता को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि सरकारी रसूख का इस्तेमाल निजी और सांप्रदायिक आधार पर बनी संस्थाओं को मजबूती देने के लिए किया जा रहा है, जिससे आम जनता का सरकारी तंत्र पर भरोसा कम हो रहा है।
अभी कई राज खुलना बाकी हैं! द ग्रेट न्यूज की टीम डॉ. लईक अहमद और इस्वा के कारनामों की जमीनी हकीकत खंगाल रही है। बहुत जल्द हम आपके सामने लाएंगे कि कैसे सरकारी पदों का इस्तेमाल निजी तिजोरियां भरने के लिए किया जा रहा है। सच से सामना करने के लिए तैयार रहिए!”