निजी अस्पतालों में आयुष्मान मरीजों से वसूली पर सख्ती, सिर्फ रकम वापस तक न रहे कार्रवाई, ICU बेड बढ़ाने के निर्देश, मंडलायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में दिए कड़े निर्देश, फर्जी बिलिंग और लापरवाही पर कार्रवाई तय
शानू कुमार ब्यूरो उत्तर प्रदेश
बरेली : मंडलायुक्त भूपेन्द्र एस. चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंडलीय समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सख्त रुख देखने को मिला, बैठक में साफ निर्देश दिए गए कि आयुष्मान कार्ड धारकों से इलाज के नाम पर किसी भी तरह की वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी अस्पताल में मरीज से पैसा लिया जाता है तो सिर्फ रकम वापस कराने तक मामला सीमित न रहे, बल्कि संबंधित पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान मंडलायुक्त ने जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि बजट के सापेक्ष होने वाले कार्यों की अलग से समीक्षा करें, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि धनराशि किन मदों में खर्च हो रही है। साथ ही ICU सुविधाओं को मजबूत करने के लिए अस्पतालों में ICU बेड बढ़ाने के भी निर्देश दिए गए। बैठक में सामने आया कि कुछ जनपदों में चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति के फर्जी मामले भी पकड़े गए हैं, जहां ऐसे अस्पतालों के बिल लगाए गए जो वास्तविकता में मौजूद ही नहीं हैं। इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त करने के निर्देश दिए गए।
वहीं इसके अलावा, मंडलायुक्त ने निर्देश दिए कि दिव्यांग प्रमाण पत्र और मेडिको-लीगल रिपोर्ट केवल पूर्ण परीक्षण के बाद ही जारी की जाएं, ताकि किसी तरह की अनियमितता न हो।
टीकाकरण और मातृ स्वास्थ्य पर जोर देते हुए कहा गया कि नवजात शिशुओं को बर्थ डोज लगभग 99 प्रतिशत तक दी जा रही है, जो संतोषजनक है। साथ ही सभी गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व हेपेटाइटिस-बी जांच अनिवार्य रूप से कराए जाने के निर्देश दिए गए, ताकि नवजातों को इस संक्रमण से बचाया जा सके।
संचारी रोग अभियान के तहत “दस्तक अभियान” में घर-घर जाकर आशा कार्यकर्ताओं द्वारा आभा आईडी बनाने और लोगों को इसके फायदे बताने की भी योजना सामने रखी गई। कुल मिलाकर बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया गया, साथ ही लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत भी दिए गए।



