🚨अपडेट: नियम कागजों में, खेल जमीन पर! आंवला के वर्मा अल्ट्रासाउंड सेंटर पर आरोपों के बाद भी जिम्मेदार बेखबर
शानू कुमार / ब्यूरो उत्तर प्रदेश
बरेली : आंवला तहसील में स्थित वर्मा अल्ट्रासाउंड एंड एक्स-रे सेंटर को लेकर उठे गंभीर सवालों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की भूमिका रहस्यमय बनी हुई है। आरोप है कि सेंटर बिना आवश्यक क्लिनिकल रजिस्ट्रेशन और अधूरे मानकों के लगातार जांच कर रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की तरफ से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि सेंटर पर लंबे समय से नियमों की अनदेखी हो रही है, लेकिन शिकायतों को दबाने का खेल चलता रहा। सीमित योग्यता वाले डॉक्टरों से अन्य जांच कराए जाने की बात सामने आने के बावजूद विभागीय चुप्पी संदेह को और गहरा कर रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि आरोप सही हैं तो अब तक सेंटर को सील क्यों नहीं किया गया? क्या किसी प्रभावशाली संरक्षण के चलते कार्रवाई को टाला जा रहा है? जनता के बीच यह चर्चा आम हो चली है कि बिना “ऊपर की सहमति” ऐसे सेंटर वर्षों तक कैसे चलते रहते हैं।
इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। क्षेत्रीय नागरिकों का सवाल है कि यदि सेंटर के पास मानक पूरे नहीं थे, तो उसे संचालन की अनुमति कैसे मिली? क्या निरीक्षण के दौरान कागजी खानापूर्ति की गई या फिर जानबूझकर इन कमियों को नजरअंदाज किया गया? यह विभागीय जांच का एक बड़ा बिंदु है।
नियमों के मुताबिक, अल्ट्रासाउंड सेंटर पर तैनात डॉक्टरों का पंजीकरण जिस श्रेणी में होता है, वे केवल उन्हीं जांचों के लिए अधिकृत होते हैं। आरोप है कि वर्मा अल्ट्रासाउंड सेंटर में पंजीकृत चिकित्सक की विशेषज्ञता सीमित होने के बावजूद, वहां अन्य जटिल श्रेणियों के अल्ट्रासाउंड भी किए जा रहे हैं। यदि ये आरोप सही हैं, तो यह सीधे तौर पर मेडिकल एथिक्स और सरकारी गाइडलाइंस का उल्लंघन है।