कंहा चली गई नगर की व्यवस्था देखने वाली पुलिस, क्या अपने कंही देखी है,
यामीन विकट
ठाकुरद्वारा : जी हां ये बात हम यूँ ही नहीं कह रहे हैं बल्कि हकीकत में ही नगर के बाजारों में गश्त करने वाली कोतवाली पुलिस कंही गायब हो गई है। पुलिस के इस तरह से बाज़ारों से गायब होने पर बाज़ारों में जंहा कदम कदम पर जाम लगने की समस्या देखने को मिल रही है
वंही दूसरी ओर करोड़ो रूपये के माल से भरी सोने चांदी के जेवरात व अन्य कीमती सामानो से भरी दुकानो पर भी इस बेतरतीब भीड़ के कारण काफी खतरे मंडरा रहे हैं। बताते चलें कि लगभग एक साल पहले कोतवाली पुलिस के दो चार कॉन्स्टेबल हर आधे घंटे में बाज़ार में चक्कर लगाते रहते थे।
जिससे आम आदमी के भीतर ये अहसास होता था कि पुलिस है वंही अपराधियों को भी डर सताता था कि पुलिस है, लेकिन अब काफी दिन से पुलिस तो है लेकिन बाज़ारों में न होकर अपने दूसरे ज़रूरी कामो में व्यस्त है और नगर के बाज़ारों और भीड़ भाड़ वाले इलाके सब राम जी की कृपा पर छोड़ दिये गए हैं। बेसहारा और लावारिस छोड़े गए इन बाजारों में ई रिक्शा, फल विक्रेताओं, और बेतरतीब खड़े वाहनों ने पूरी तरह से अपना कब्जा जमा लिया है।
और इसी वजह से तिकोनिया बस स्टैंड से लेकर रामपाल सिंह द्वार तक और कदीर तिराहे से लेकर अस्पताल रोड तक प्रतिदिन कभी भी कोई किसी से भिड़ता देखा जा सकता है। वर्तमान समय में पवित्र रमज़ान के महीने में बाज़ारों में खरीदारी करने वाले महिला पुरुषों की संख्या बढ़ी हुई है और ऐसे में भी कोतवाली में तैनात नगर की ज़िम्मेदारी के लिए लगाए गए कॉन्स्टेबलों केवल कागज़ी तौर पर बाज़ारो में तैनात हैं जबकि सच्चाई ये है।
कि ये उन्ही कामो में व्यस्त हैं जिनमे उनका निजी स्वार्थ शामिल है। ऐसे में कभी भी कोई भी बड़ी घटना होना कोई बड़ी बात नहीं होगी। इस लिए हम तो केवल इतना ही कहेंगे कि कोतवाल साहब अपने कॉन्स्टेबलों को देखिए ये कंहा ड्यूटी कर रहे हैं।