मनरेगा पर भाजपा-काग्रेंस आमने सामने,भाजपा ने काग्रेंस को बताया विकास विरोधी,तो वही कांग्रेस ने मोदी सरकार को “बोला” योजनाओं के नाम चोरी करने में“मास्टर”।
,लालकुआँ में मनरेगा को लेकर एक फिर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं।
यहाँ हल्दूचौड स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेसवार्ता में भाजपा के पूर्व विधायक नवीन चन्द्र दुम्का ने कांग्रेस के विरोध पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस केवल दिखावे के लिए विरोध कर रही है। कांग्रेस को इस बात पर आपत्ति है कि मनरेगा योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाया गया, जबकि उन्होंने अपने शासनकाल में गांधी जी के लिए कोई ठोस काम नहीं किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन में मनरेगा को लेकर लाखों की धांधली की शिकायतें आईं थी। इसमें फर्जी मास्टर रोल बनाकर मजदूरों की राशि में भ्रष्टाचार किया गया।
उन्होंने कहा कि नया विकसित भारत अधिनियम ग्रामीण विकास में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगा और वास्तविक मजदूरों को सीधे लाभ देगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लाया गयी यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा मनरेगा में जहां पहले 100 दिनों का रोजगार मिलता था, अब इस योजना के तहत 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया जाएगा। मजदूरी का भुगतान सात दिनों के भीतर होगा और विलंबित भुगतान पर अतिरिक्त राशि भी दी जाएगी। उन्होंने काग्रेंस को जनविरोधी बताया।
इधर वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरेन्द्र बोरा और युवा नेता हेमवती नन्दन दुर्गापाल ने केंद्र की भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि मोदी सरकार योजनाओं के नाम चोरी करने में “मास्टर” है।उन्होंने कहा कि कि भाजपा देश को बांटने और भटकाने की राजनीति कर रही है जो देश के लिए हानिकारक है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से भाजपा ने मनरेगा का नाम बदलकर ‘एक तीर से दो शिकार’ करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने कई बदलाव करके मनरेगा की रीढ़ को कमजोर कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की मंशा है कि देश में गरीब, गरीब ही रहे और अमीर और अधिक अमीर हो जाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस भाजपा की इस मंशा को पूरा नहीं होने देगी।
उन्होंने कहा कि मनरेगा को बचाने के लिए कांग्रेस संसद से लेकर सड़क तक जन आंदोलन चलाएगी। जिसकी शुरुआत उत्तराखण्ड हो चुकी है उन्होंने दावा किया है कि काले कृषि कानूनों की तरह, केंद्र सरकार को मनरेगा पर लिए गए अपने फैसले को भी वापस लेना पड़ेगा।