विकलांग स्वास्थ्य व्यवस्था डॉक्टर होने के बाद भी मरीजों को नहीं मिल रहा इलाज रेफर सेंटर बन कर रहे गया अस्पताल
लोहाघाट (चंपावत) : चंपावत जिले के सबसे ज्यादा ओपीडी वाले अस्पतालों में से एक लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सुविधा ना देने से विशेषज्ञ डॉक्टर मरीजों का इलाज करने में मजबूर है उप जिला चिकित्सालय लोहाघाट में 5 साल बाद हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अमरीश कुमार की नियुक्ति हुए करीब 1 महीना बीत चुका है लेकिन ऑपरेशन थिएटर मे आवश्यक उपकरण व सुविधा ना होने के कारण लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय में हड्डी का ऑपरेशन नहीं कर पा रहे है हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अमरीश कुमार ने बताया कि अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर तैयार नहीं है तथा उपकरणों की भारी कमी है जिसके लिए सीएमओ को पत्र लिखा जा चुका है उपकरणों तथा ऑपरेशन थिएटर की कमी की वजह से मजबूरी में उन्हें मरीजों को जिला मुख्यालय में रेफर करना पड़ा है।
चिकित्सालय में एनएसथीसिया डॉक्टर भी मौजूद है लेकिन सुविधाओं के अभाव के चलते वे मरीजों के ऑपरेशन नहीं कर पा रहे हैं उन्होंने कहा अगर उन्हें ऑपरेशन थिएटर की सुविधाएं व उपकरण उपलब्ध करवाए जाए तो वे लोहाघाट चिकित्सालय में मरीजों के ऑपरेशन करना शुरू कर देंगे ताकि दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को बाहर केअस्पतालों के चक्कर न काटने पड़े वही चिकित्सालय में आंखों के ऑपरेशन के लिए डीएम चंपावत नरेंद्र सिंह भंडारी के द्वारा 25 लाख रुपए की लागत से माइक्रोस्कोप उपलब्ध करवाया गया जिसके बाद क्षेत्र के लोगों को अस्पताल में ही आंखों का ऑपरेशन होने की आस जगी थी लेकिन अस्पताल में तकनीशियन तथा ऑपरेशन के उपकरण ना मिलने पर आई सर्जन डॉक्टर विराज राठी भी आंखों के ऑपरेशन नहीं कर पा रहे हैं डॉ राठी ने कहा उपकरणों के लिए कई बार सीएमओ से कहा गया लेकिन उपकरण, इनवर्टर तथा सहायक तकनीशियन उपलब्ध ना होने से मरीजों के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं जिस कारण मरीजों को जिला चिकित्सालय या अन्य अस्पतालों में आंखों का ऑपरेशन करने के लिए जाना पड़ रहा है कुल मिलाकर स्वास्थ्य विभाग की ढीली ढाली कार्यप्रणाली व उदासीनता का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
डॉक्टर इलाज करना चाह कर भी मरीजों का इलाज नहीं कर पा रहे हैं स्वास्थ्य विभाग ने संज्ञान लेना चाहिए वही मामला डीएम चंपावत नरेंद्र सिंह भंडारी के संज्ञान में आने पर उन्होंने अस्पताल में सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है ताकि मरीजों को लोहाघाट में ही बेहतर उपचार मिल सके उन्हें बाहर के अस्पतालों के चक्कर न काटने पड़े कुल मिलाकर राजनीति का गढ़ माने जाने वाले लोहाघाट में कोई भी नेता अस्पताल में सुविधाये उपलब्ध कराने के लिए बोलने तक को तैयार नहीं है जिसका खामियाजा क्षेत्र की जनता को भुगतना पड़ रहा है।