लालकुआं की ‘खूनी सड़क’ पर पूर्व मंत्री दुर्गापाल का ‘रणघोष’: NHAI की लापरवाही पर डीएम को लिखा कड़ा पत्र, दी बड़े जनआक्रोश की चेतावनी!
लालकुआं (मुकेश कुमार): राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की कार्यप्रणाली और बरेली रोड (बबूरगुमटी से गोरापड़ाव) की लगातार हो रही अनदेखी ने अब सियासी गलियारों में उबाल पैदा कर दिया है। क्षेत्र में आए दिन हो रहे सड़क हादसों और सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ते देख पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर जिलाधिकारी नैनीताल को एक पत्र प्रेषित किया है,
जिसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि NHAI की लापरवाही अब आम जनता की जान पर भारी पड़ रही है। पूर्व मंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में राजमार्ग का निर्माण करते समय शुरुआत से ही सर्विस रोड की अनदेखी की गई, जो आज दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा सबब बन गई है।
दुर्गापाल ने अपने पत्र में दर्द बयां करते हुए कहा कि बरेली रोड के किनारे बबूरगुमटी, हल्दूचौड़, बेरीपड़ाव, मोटाहल्दू और मोतीनगर जैसे व्यस्ततम इलाके बसे हैं। यहाँ न केवल राजकीय महाविद्यालय और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, बल्कि दर्जनों निजी व सरकारी स्कूल, धार्मिक स्थल और बैंक भी स्थित हैं, जहां हर वक्त हजारों लोगों और छात्रों की आवाजाही रहती है। बावजूद इसके, NHAI ने न तो सर्विस रोड का निर्माण किया, न अव्यवस्थित कटों को दुरुस्त किया और न ही अंधेरे में डूबे इस राजमार्ग पर पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था की। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार लिखित और मौखिक रूप से गुहार लगाने के बाद भी प्राधिकरण के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है, जो कि जनहित के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है।
जिलाधिकारी से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए पूर्व मंत्री ने दो टूक निर्देश देने का आग्रह किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि जनहित को देखते हुए बरेली रोड के दोनों ओर सर्विस रोड का निर्माण नहीं शुरू हुआ, खतरनाक कटों को व्यवस्थित नहीं किया गया और पूरे मार्ग को दूधिया रोशनी से नहीं नहलाया गया, तो क्षेत्र की जनता का धैर्य जवाब दे जाएगा। उन्होंने प्रशासन को चेताया कि NHAI की इस ‘सुस्ती’ के कारण क्षेत्र में जनआक्रोश चरम पर है और किसी भी बड़े आंदोलन की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। यह पत्र अब प्रशासनिक हल्कों में चर्चा का विषय बना हुआ है, और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि अब शायद इस ‘मौत के सफर’ को सुरक्षा का कवच मिल सकेगा।