पत्रकार अज़हर मलिक की रिपोर्ट ने जगाई सरकार की नींद, मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश
उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की विफलता और गरीब परिवारों की समस्याओं को उजागर करती खबर का असर
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग निवासी अभिषेक कुमार की दर्दनाक मौत ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं और गरीबी की स्थिति को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। यह खबर प्रमुखता से पत्रकार अजहर मलिक द्वारा प्रकाशित की गई थी, जिसने इस मुद्दे को उजागर किया। अन्य संस्थाओं ने भी इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। अभिषेक की बहन शिवानी, जो हल्द्वानी में एक निजी कंपनी में काम करती हैं, को भाई का शव अपने गांव भेजने के लिए एंबुलेंस के लिए 10,000 से 12,000 रुपये की भारी रकम चुकानी पड़ी। यह रकम उनके लिए असंभव थी, जिससे उन्हें टैक्सी मालिक की मदद लेनी पड़ी और शव को टैक्सी के ऊपर बांधकर भेजना पड़ा।
यह घटना उत्तराखंड के स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत और गरीब परिवारों के संघर्ष को सामने लाती है। सरकारी एंबुलेंस सेवा उपलब्ध होने के बावजूद, आर्थिक तंगी के कारण गरीबों के लिए ये सेवाएं पहुंच से बाहर हो जाती हैं। इस मुद्दे को उजागर करने वाली पत्रकार अज़हर मलिक की खबर के बाद, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पर तत्काल संज्ञान लिया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि जरूरतमंदों को समय पर एंबुलेंस और एयर एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, साथ ही इसके लिए एसओपी तैयार करने का आदेश दिया।
मुख्यमंत्री धामी ने शीतकालीन चारधाम यात्रा के तहत शीतकालीन स्थलों के महत्व और प्रचार-प्रसार की दिशा में भी अधिकारियों को निर्देश दिए। इस घटना और मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद यह सवाल उठता है कि क्या स्वास्थ्य सेवाओं और गरीबों की समस्याओं का समाधान जल्द होगा, या फिर इसे सिर्फ सरकारी योजनाओं और घोषणाओं तक ही सीमित रह जाएगा?