उत्तराखंड के सांसदों का ‘रिपोर्ट कार्ड’ फेल: 95 करोड़ की निधि, पर खर्च सिर्फ 18%! अनिल बलूनी का खाता भी नहीं खुला
काशीपुर (अज़हर मलिक): देवभूमि उत्तराखंड के विकास के बड़े-बड़े दावों की हवा निकल गई है। आरटीआई (RTI) से हुए एक ताजा खुलासे ने सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। राज्य के 8 सांसदों को विकास कार्यों के लिए कुल 95.90 करोड़ रुपये की सांसद निधि मिली थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि दिसंबर 2025 के अंत तक इसमें से मात्र 18% हिस्सा ही जमीन पर खर्च हो पाया है।
RTI में बड़ा खुलासा: तिजोरी भरी, पर काम खाली
प्रसिद्ध आरटीआई कार्यकर्ता नदीम उद्दीन द्वारा निकाली गई जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड के सांसदों ने कुल 232 काम प्रस्तावित किए थे। लेकिन सिस्टम की सुस्ती देखिए—इनमें से 87 काम ऐसे हैं जो कागजों पर तो पास हो गए, मगर जमीन पर ईंट तक नहीं रखी गई।
किस सांसद का क्या है हाल?
रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाला नाम गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी का है, जिनका विकास खर्च ‘शून्य’ (0%) दर्ज किया गया है। वहीं:
त्रिवेंद्र सिंह रावत (हरिद्वार) और अजय टम्टा (अल्मोड़ा): इनका खर्च 1% के आंकड़े को भी नहीं छू सका।
नरेश बंसल (राज्यसभा): 47% खर्च के साथ सबसे आगे रहे।
अजय भट्ट (लोकसभा): केवल 18% निधि का उपयोग कर पाए।
जनता के हक पर ‘सिस्टम’ का ताला?
यह आंकड़े बताते हैं कि या तो सांसदों का अपने अधिकारियों पर नियंत्रण नहीं है, या फिर विकास की फाइलें जानबूझकर दबाई गई हैं। जब राज्य की सड़कें टूटी हों और स्कूल बदहाल हों, तब करोड़ों रुपये का फंड बिना इस्तेमाल के पड़े रहना जनता के साथ विश्वासघात जैसा है।
“क्या अधिकारी बेलगाम हैं या माननीय गंभीर नहीं? 232 काम फाइलों में दबे रहना सिस्टम की नाकामी का सबसे बड़ा सबूत है।”