रक्षक ही बना भक्षक? नैनीताल विंटर कार्निवल की चकाचौंध के बीच पुलिस के वाहन ने तीन मजदूरों को रौंदा, तड़पता छोड़ फरार हुआ ‘खाकी’ का सारथी!
सरोवर नगरी नैनीताल जहाँ इन दिनों विंटर कार्निवल की रौनक और पर्यटकों की चहल-पहल से गुलजार है, वहीं तल्लीताल थाना क्षेत्र के पुलिस लाइन के पास एक ऐसी हृदयविदारक घटना घटी जिसने खाकी की संवेदनशीलता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। रोजी-रोटी की तलाश में घर से निकले तीन दिहाड़ी मजदूर—पप्पू कुमार, बिहारी लाल और मोहन राम—अपनी मेहनत की राह पर थे, तभी पुलिस लाइन के समीप पुलिस के ही एक अनियंत्रित वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मारकर लहूलुहान कर दिया।
शर्मनाक बात यह रही कि जिस पुलिस पर लोगों की सुरक्षा का जिम्मा है, उसी का एक कर्मी मानवता को शर्मसार करते हुए घायलों की मदद करने के बजाय वाहन समेत मौके से फरार हो गया। तल्लीताल के हरिनगर निवासी इन तीनों बेबस मजदूरों को स्थानीय लोगों और पास मौजूद पुलिस लाइन के कर्मियों ने आनन-फानन में राजकीय बी.डी. पांडे अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उनकी हालत अत्यंत गंभीर बनी हुई है। यह हादसा उस वक्त हुआ है जब शहर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आगमन को लेकर सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम हैं और भारी पुलिस बल तैनात है, लेकिन व्यवस्था की इसी चौकसी के बीच अपनी किस्मत को कोसते ये गरीब मजदूर अब अस्पताल के बिस्तरों पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। अपने परिवार का पेट पालने के लिए सुबह-सुबह काम पर निकले इन बेकसूरों के लिए यह विंटर कार्निवल किसी दुःस्वप्न जैसा साबित हुआ, जहाँ एक तरफ उत्सव की धूम है और दूसरी तरफ सिस्टम की बेरुखी से घायल हुए इन मजदूरों के परिवारों में कोहराम मचा है। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच में जुटने की बात तो कह रही है, लेकिन शहर के बीचों-बीच हुई इस घटना ने आम जनता के मन में गहरे आक्रोश और तंत्र के प्रति अविश्वास को जन्म दे दिया है
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