ऋषिकेश एम्स: विश्वस्तरीय संस्थान के शौचालय ‘बदहाली के गर्त’ में, गंदगी और टूटी टोटियों के बीच मरीज और तीमारदार बेहाल
अज़हर मलिक
ऋषिकेश: देवभूमि के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ऋषिकेश, जहाँ लोग जीवन की नई उम्मीद लेकर दूर-दूर से आते हैं, वहाँ की स्वच्छता व्यवस्था वर्तमान में दम तोड़ती नजर आ रही है। संस्थान के शौचालयों की स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि इन्हें ‘बीमारी का घर’ कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा। वायरल तस्वीरों और धरातलीय रिपोर्ट के अनुसार, शौचालय के भीतर का दृश्य किसी नरक से कम नहीं है;
यहाँ शौचालयों फर्श पर हर तरफ गंदा और बदबूदार पानी जमा है, जो न केवल फिसलने का डर पैदा करता है बल्कि संक्रमण के खतरे को भी कई गुना बढ़ा रहा है। शौचालयों के दरवाजों की हालत यह है कि वे पूरी तरह सड़ चुके हैं और उन पर जगह-जगह गुटखे व पान की पीक के निशान संस्थान की मर्यादा को कलंकित कर रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर है, क्योंकि कई दरवाजों से कुंडी (लॉक) नदारद है, जिसके कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी असहजता का सामना करना पड़ रहा है।
इतना ही नहीं, पानी की टोटियाँ टूटी हुई हैं और स्वच्छता के बुनियादी मानकों का नामो-निशान तक नहीं दिख रहा है। अस्पताल प्रशासन की इस कथित लापरवाही के कारण गंदगी का ऐसा अंबार लगा है कि स्वस्थ व्यक्ति भी यहाँ संक्रमण की चपेट में आ सकता है। करोड़ों के बजट और स्वच्छता अभियान के बड़े-बड़े दावों के बीच, एम्स जैसे संस्थान में शौचालय की यह बदतर हालत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करती है।
