इन्कार की दीवार ढही, तस्वीर ने खोली सच्चाई ‘इस्वा’ कनेक्शन में घिरे सवालों में डिप्टी सीएमओ, “कोई जुड़ाव नहीं” कहने वाले डॉ. लईक अहमद अब मंच से बांटते दिखे सामान, सरकारी पद पर रहते निजी संस्था से नजदीकी को लेकर उठे सवाल, सीएमओ बरेली से नजदीकी या नियमों का साफ उल्लंघन
शानू कुमार ब्यूरो उत्तर प्रदेश
बरेली में स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सीएमओ डॉ. लईक अहमद के बयान और सामने आई तस्वीरों के बीच विरोधाभास ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस संस्था ‘इस्वा’ से उन्होंने पहले किसी भी तरह के जुड़ाव से इनकार किया था, उसी के कार्यक्रम में अब उनकी मौजूदगी चर्चा का विषय बन गई है।
हाल ही में आयोजित एक रोजा इफ्तार कार्यक्रम, गेट-टुगेदर और डिनर कार्यक्रम में ‘इस्वा’ द्वारा जरूरतमंदों को साइकिल और अन्य जरूरी सामान वितरित किए गए। कार्यक्रम की सामने आई तस्वीरों में डॉ. लईक अहमद वितरण करते हुए नजर आ रहे हैं। इसके बाद उनके पहले दिए गए बयान की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक जिम्मेदार सरकारी अधिकारी सार्वजनिक रूप से किसी संस्था से दूरी की बात कर चुका हो, तो उसी संस्था के कार्यक्रम में इस तरह की सक्रिय मौजूदगी क्या संकेत देती है। इसे लेकर संभावित जुड़ाव और भूमिका पर चर्चा तेज हो गई है।
सरकारी सेवा आचरण नियमों के तहत किसी भी अधिकारी का बिना अनुमति निजी या सामाजिक संस्थाओं के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी संवेदनशील मानी जाती है, खासकर तब जब इससे हितों के टकराव की स्थिति बन सकती हो। ऐसे में इस पूरे प्रकरण को नियमों के संभावित उल्लंघन के रूप में भी देखा जा रहा है।
तस्वीर सामने आने के बाद विभाग के भीतर हलचल बढ़ गई है। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विभागीय अनुमति ली गई थी या नहीं।
इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे स्थिति और अधिक चर्चा में बनी हुई है।इस संबंध में डॉ. लईक अहमद का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।



