भक्ति और ज्ञान की ज्योति से आलोकित हुआ सूची कस्बा,श्रीराम कथा का हुआ समापन
रायबरेली
जनपद के विकास खंड सलोन स्थित सूची कस्बा एक बार फिर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा, जब विगत 17 वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत आयोजित चार दिवसीय श्रीराम कथा एवं मानस संत सम्मेलन का भव्य समापन हुआ। अंतिम दिवस पर पूरा वातावरण राममय हो गया और श्रद्धालुओं की आस्था अपने चरम पर दिखाई दी।
समापन अवसर पर चित्रकूट की पावन भूमि से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक राजहंस तुलसी किंकर जी महाराज ने रामचरितमानस के सुंदरकांड की अमूल्य चौपाई—
- “जहां सुमति तहां संपत्ति नाना, जहां कुमति तहं बिपति निदाना“—
का भावपूर्ण और गहन विवेचन करते हुए कहा कि सद्बुद्धि और सकारात्मक सोच ही जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कुंजी है। उन्होंने बताया कि निर्मल विचारों वाले व्यक्ति के जीवन में सफलता और लक्ष्मी का स्वतः आगमन होता है, जबकि नकारात्मकता व्यक्ति को संकट और दुःख की ओर धकेलती है।
इसी क्रम में डलमऊ से आए कथावाचक शिवचैतन्य शुक्ल जी ने हनुमान चालीसा की चौपाई—
“विद्यावान गुनी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर“—
के माध्यम से हनुमान जी के आदर्श चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि ज्ञान और बुद्धिमत्ता तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग निस्वार्थ सेवा और लोककल्याण में किया जाए। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को अहंकार त्यागकर समाज और धर्म के कार्यों में समर्पित रहने की प्रेरणा दी।
वहीं, चित्रकूट से ही पधारी कथा वाचिका देवी श्वेताम्भरा जी ने रामचरितमानस की गूढ़ चौपाई—
“काम, क्रोध, मद, लोभ, सब, नाथ नरक के पंथ…”—
का मार्मिक विश्लेषण करते हुए कहा कि ये दुर्गुण मनुष्य को पतन की ओर ले जाते हैं। उन्होंने विभीषण और रावण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि अहंकार और वासना ही रावण के विनाश का कारण बने। उन्होंने श्रद्धालुओं को इन अवगुणों से दूर रहकर भगवान के नाम स्मरण की प्रेरणा दी।
समापन अवसर पर कथा स्थल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। भजन, कीर्तन और जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा, मानो स्वयं प्रभु श्रीराम की कृपा उस भूमि पर अवतरित हो गई हो।
इस अवसर पर व्यवस्थापक पंडित बाल गोपाल त्रिपाठी, पूर्व ब्लाक प्रमुख कुंवर आजाद सिंह, अरुण कुमार सिंह, बृजेश कुमार सिंह, लाल पांडेय, डॉ. वंश बहादुर सिंह भदौरिया, पप्पू सिंह, भगवान बक्श सिंह सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
चार दिवसीय इस भव्य आध्यात्मिक आयोजन ने न केवल श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर किया, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाले मूल्यों का सशक्त संदेश भी दिया।




