छात्र राजनीति से बंगाल CM की कुर्सी तक… कैसे शुरू हुआ था सुवेंदु अधिकारी का सियासी सफर?
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में जिस नाम ने ममता बनर्जी की मजबूत पकड़ को सबसे बड़ा झटका दिया, वह नाम है सुवेंदु अधिकारी। कभी टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार रहे सुवेंदु आज बंगाल बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा बन चुके हैं। छात्र राजनीति से शुरू हुआ उनका सफर अब मुख्यमंत्री पद की कुर्सी तक पहुंच चुका है। बंगाल चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के बाद अमित शाह ने उनके नाम पर मुहर लगा दी है।
नंदीग्राम से निकला बंगाल का नया राजनीतिक चेहरा
सुवेंदु अधिकारी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में तब आया जब उन्होंने नंदीग्राम आंदोलन में किसानों की आवाज बनकर पूरे बंगाल की राजनीति को बदल दिया। 2007 में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हुए आंदोलन में उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को जोड़ा। पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक दबाव के बीच भी वे किसानों के साथ डटे रहे।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि नंदीग्राम आंदोलन ने ही 34 साल पुरानी वाम सरकार की जड़ें हिला दी थीं और 2011 में ममता बनर्जी की सत्ता का रास्ता तैयार किया था।
कैसे शुरू हुआ सुवेंदु अधिकारी का सियासी सफर?
15 दिसंबर 1970 को पूर्वी मेदिनीपुर के कांथी में जन्मे सुवेंदु अधिकारी एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी बंगाल की राजनीति के बड़े चेहरों में गिने जाते रहे हैं। राजनीतिक माहौल में पले-बढ़े सुवेंदु ने छात्र राजनीति से अपने करियर की शुरुआत की।
1989 में उन्होंने कांग्रेस छात्र परिषद से जुड़कर राजनीति में एंट्री की। उस दौर में बंगाल में वामपंथी छात्र संगठनों का दबदबा था, लेकिन सुवेंदु ने विपक्षी छात्र नेता के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई।
ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेता कैसे बने?
1998 में जब ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस बनाई, तब अधिकारी परिवार उनके साथ खड़ा हो गया। इसके बाद सुवेंदु अधिकारी तेजी से टीएमसी के बड़े नेताओं में शामिल हो गए। संगठन क्षमता और जमीनी पकड़ की वजह से ममता उन्हें बेहद भरोसेमंद मानती थीं।
वे रातों को गांवों में रुकते, स्थानीय भाषा में लोगों से जुड़ते और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत नेटवर्क तैयार करते रहे। यही वजह रही कि मेदिनीपुर और नंदीग्राम क्षेत्र में उनका प्रभाव लगातार बढ़ता गया।
टीएमसी छोड़ बीजेपी में क्यों आए?
2020 आते-आते टीएमसी और सुवेंदु अधिकारी के बीच दूरियां बढ़ने लगीं। आखिरकार उन्होंने पार्टी छोड़कर बीजेपी जॉइन कर ली। इसके बाद बंगाल की राजनीति पूरी तरह बदल गई।
2021 विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने अपनी सुरक्षित भवानीपुर सीट छोड़कर नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का फैसला किया, लेकिन यहां सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें कड़ी टक्कर देते हुए हरा दिया। यह जीत उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई।
बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के पीछे क्या रही रणनीति?
2026 के चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने संदेशखाली, आरजीकर, हावड़ा-उलबेरिया और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने लगातार यात्राएं कीं, बूथ स्तर तक संगठन मजबूत किया और टीएमसी की कमजोरियों को जनता के बीच बड़ा मुद्दा बनाया।
बीजेपी को 3 सीटों से 77 पार पहुंचाने में उनकी रणनीति और जमीनी नेटवर्क ने अहम भूमिका निभाई। यही कारण है कि अब उन्हें बंगाल की सत्ता का सबसे बड़ा चेहरा माना जा रहा है।
कैसा है सुवेंदु अधिकारी का निजी जीवन?
सुवेंदु अधिकारी अविवाहित हैं और उत्कल ब्राह्मण समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। उनका पूरा परिवार राजनीति में सक्रिय रहा है। हालांकि उनके खिलाफ कई मुकदमे भी दर्ज हैं, लेकिन वे इन्हें राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते रहे हैं।
क्या बंगाल को मिल गया नया मुख्यमंत्री?
नंदीग्राम आंदोलन से निकला यह नेता अब बंगाल की राजनीति का सबसे ताकतवर चेहरा बन चुका है। छात्र राजनीति से मुख्यमंत्री पद तक का सुवेंदु अधिकारी का सफर इस बात का उदाहरण है कि जमीनी राजनीति, सही रणनीति और समय पर लिया गया बड़ा फैसला किस तरह सत्ता बदल सकता है।
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