ममता सरकार के 15 साल में जारी 1.69 करोड़ SC-ST-OBC सर्टिफिकेट की होगी जांच, शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला
पश्चिम बंगाल में जाति प्रमाणपत्रों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। राज्य की नई सरकार ने ममता बनर्जी के 15 वर्षों के शासनकाल के दौरान जारी किए गए करीब 1.69 करोड़ SC, ST और OBC प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच कराने का फैसला लिया है। इस कदम के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल मच गई है।
2011 से 2026 तक जारी सभी प्रमाणपत्रों का होगा पुनः सत्यापन
पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग विकास विभाग ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वर्ष 2011 से 2026 के बीच जारी किए गए सभी SC, ST और OBC प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच की जाए। यह वही अवधि है जिसमें राज्य में तृणमूल कांग्रेस की सरकार रही।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इन 15 वर्षों में:
- 1 करोड़ SC प्रमाणपत्र जारी किए गए
- 21 लाख ST प्रमाणपत्र जारी हुए
- 48 लाख OBC प्रमाणपत्र बनाए गए
फर्जी दस्तावेज देने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
नबन्ना सचिवालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि यदि किसी व्यक्ति ने फर्जी दस्तावेज देकर गलत तरीके से आरक्षण का लाभ लेने के लिए प्रमाणपत्र बनवाया है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सिर्फ लाभार्थियों ही नहीं, बल्कि ऐसे सरकारी अधिकारियों पर भी शिकंजा कसेगा जिन्होंने कथित तौर पर पैसे या अन्य लाभ लेकर गलत प्रमाणपत्र जारी किए।
कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी सख्ती
मई 2024 में कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने वर्ष 2010 के बाद जारी किए गए कई OBC प्रमाणपत्रों को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा था कि OBC सूची तैयार करने की प्रक्रिया कानून के अनुरूप नहीं थी।
इसके अलावा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) ने भी पिछले वर्ष दिसंबर में पश्चिम बंगाल की 35 जातियों को केंद्रीय OBC सूची से बाहर कर दिया था। इनमें अधिकांश जातियां मुस्लिम समुदाय से संबंधित बताई गई थीं।
भाजपा का आरोप- वोट बैंक के लिए हुई गड़बड़ी
भाजपा लंबे समय से ममता बनर्जी सरकार पर आरोप लगाती रही है कि OBC सूची में शामिल करने के नियमों में कथित तौर पर बदलाव कर खास समुदायों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई। अब नई सरकार इस पूरे मामले की गहन जांच कराने जा रही है।
बंगाल में फैसलों की समीक्षा का दौर जारी
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही पिछली सरकार के कई फैसलों की समीक्षा शुरू हो चुकी है। इससे पहले आरजी कर अस्पताल दुष्कर्म और हत्या मामले में कथित लापरवाही को लेकर तीन वरिष्ठ IPS अधिकारियों को निलंबित किया गया था।
अब जाति प्रमाणपत्रों की जांच को लेकर बंगाल की राजनीति में बड़ा टकराव देखने को मिल सकता है।



