रामनगर वन प्रभाग में ‘डेंजर टूरिज्म’: सीएम धामी के ‘जीरो टॉलरेंस’ को ठेंगा दिखा रहे अफसर, रेंजर की लापरवाही पर दो बार कॉल करने के बाद भी भागे DFO डी. एस. मर्तोलिया
अज़हर मलिक
रामनगर : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जहाँ एक तरफ सूबे में ‘जीरो टॉलरेंस’ और प्रशासनिक पारदर्शिता का दावा करते हैं, वहीं जमीन पर बैठे अधिकारी उनके इन दावों को ठेंगा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ताजा मामला रामनगर वन प्रभाग के कोसी रेंज से सामने आया है, जहाँ आरक्षित वन भूमि के बेहद संवेदनशील इलाके में मचान रिसॉर्ट के कर्मचारियों द्वारा पर्यटकों को ‘मौत का डेंजर टूरिज्म’ सरेआम कराया जा रहा था। इस प्रतिबंधित क्षेत्र में कदम-कदम पर बाघ, हाथी और तेंदुए जैसे हिंसक वन्यजीवों का पहरा रहता है, लेकिन कोसी रेंज के रेंजर और उनकी गश्ती टीम गहरी नींद सोई रही। जब सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद विभाग की जमकर किरकिरी हुई, तो रेंजर साहब ने महक एक नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया, जिसे महज एक प्रशासनिक खानापूर्ति और लीपापोती माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री धामी के राज में इस तरह की घोर लापरवाही और वन्यजीवों की सुरक्षा से खिलवाड़ पर जब ‘The Great News’ की टीम ने सीधे रामनगर डिवीजन के डीएफओ (DFO) डी. एस. मर्तोलिया से उनका पक्ष जानना चाहा, तो सच से सामना करने के बजाय साहब सवालों से भाग खड़े हुए। ‘The Great News’ के रिपोर्टर द्वारा एक के बाद एक, पूरे दो बार सीधे डीएफओ साहब के नंबर पर कॉल किया गया, घंटी बजती रही, लेकिन साहब ने दोनों ही बार कॉल उठाना मुनासिब नहीं समझा। पत्रकार के दो-दो फोन कॉल्स को इस तरह नजरअंदाज करना साफ तौर पर दर्शाता है कि रामनगर वन प्रभाग के मुखिया के पास इस प्रशासनिक लापरवाही का कोई जवाब नहीं है और वे सच को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
जनता आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सीधा सवाल पूछ रही है कि आखिर किसकी शह पर ये अधिकारी कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं? अगर प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी हिंसक जानवर ने इन पर्यटकों पर हमला कर दिया होता, तो उस बेमोल मौत का जिम्मेदार कौन होता? क्या गश्त के दावे सिर्फ कागजी फाइलों तक सीमित हैं? जब एक रिसॉर्ट का दल इतनी आसानी से आरक्षित क्षेत्र में घुस सकता है, तो क्या वन्यजीव शिकारी और लकड़ी तस्कर भी इसी ढिलाई का फायदा नहीं उठा रहे होंगे? रेंजर की यह संदिग्ध खामोशी और डीएफओ डी. एस. मर्तोलिया का सवालों से भागना सीधे तौर पर कर्तव्यहीनता की ओर इशारा करता है। मुख्यमंत्री धामी को बदनाम कर रहे ऐसे लापरवाह अधिकारियों पर अब केवल नोटिसबाजी नहीं, बल्कि तत्काल कठोर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए ताकि जंगलों और इंसानी जिंदगी को सुरक्षित रखा जा सके।



