कर्तव्य पथ पर थमी सांसें: नैनीताल पुलिस के जांबाज फायरमैन जगजीत सिंह का सड़क हादसे में दर्दनाक निधन, महकमे में पसरा मातम

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कर्तव्य पथ पर थमी सांसें: नैनीताल पुलिस के जांबाज फायरमैन जगजीत सिंह का सड़क हादसे में दर्दनाक निधन, महकमे में पसरा मातम

अज़हर मलिक 

उत्तराखंड पुलिस के बेड़े से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। कर्तव्य की वेदी पर अपनी जान न्योछावर करने वाले जनपद नैनीताल के फायर स्टेशन मल्लीताल में तैनात जांबाज फायरमैन जगजीत सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। बीते २२ जून २०२६ की काली रात एक खौफनाक वाहन दुर्घटना के रूप में आई, जिसमें ड्यूटी के दौरान जगजीत सिंह गंभीर रूप से चोटिल हो गए। अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझते हुए इस बहादुर सिपाही ने दम तोड़ दिया। इस असामयिक और हृदयविदारक निधन की खबर मिलते ही पूरे उत्तराखंड पुलिस महकमे और नैनीताल पुलिस परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है। अपने एक बेहद कर्तव्यनिष्ठ और हंसमुख साथी को खोने के गम में हर आंख नम है और पुलिस महकमे का हर दिल मर्माहत है।

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इस गहरे दुख की घड़ी में नैनीताल के एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टी.सी. ने तुरंत मोर्चरी पहुंचकर दिवंगत साथी के परिजनों को गले लगाया, उनका ढांढस बंधाया और इस असहनीय दर्द को बांटने की कोशिश की। उन्होंने पीड़ित परिवार को तात्कालिक सहायता राशि सौंपते हुए आश्वस्त किया कि पूरा पुलिस महकमा हर मोड़ पर उनके साथ खड़ा रहेगा। महकमे के मुखिया समेत समस्त पुलिस परिवार ने अपने इस वीर साथी को अश्रुपूर्ण आंखों से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। ऊधमसिंह नगर के बाजपुर स्थित ग्राम बाजावाला के मूल निवासी जगजीत सिंह को उनके पैतृक आवास पर पूरे राजकीय सम्मान और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी, जो उनके बलिदान और सेवा को महकमे का आखिरी सलाम होगा।

महज ३८ वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए जगजीत सिंह का सेवाकाल देश सेवा और समर्पण की एक बेमिसाल दास्तां रहा है। १४ दिसंबर २००७ को पुलिस महकमे का हिस्सा बने जगजीत ने अपने लगभग १९ वर्षों के लंबे सेवाकाल में ऊधमसिंह नगर, नैनीताल और चंपावत जैसे दुर्गम क्षेत्रों में रहते हुए जनता की जान-माल की रक्षा के लिए खुद को झोंक दिया। गुरदीप सिंह के इस होनहार बेटे ने हमेशा अग्रिम मोर्चे पर रहकर आपदाओं से लोहा लिया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस नैनीताल की वादियों में उन्होंने २००८ से २०१० तक सेवाएं दी थीं, वहीं २०२४ में दोबारा लौटकर मल्लीताल फायर स्टेशन को अपनी कर्मभूमि बनाया और यही उनकी अंतिम नियुक्ति साबित हुई। नैनीताल पुलिस अपने इस जांबाज साथी की सेवाओं और उनकी शहादत को सदैव याद रखेगी, उनका नाम इतिहास के पन्नों में अमर रहेगा।

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