मतदाता सूची सुधार की आड़ में बड़ा फर्जीवाड़ा, जिंदा लोगों को कागजों में मार वोट काटने वाले अज्ञात ‘साजिशी गिरोह’ का पर्दाफाश! की मांग
अज़हर मलिक
उत्तराखंड में निर्वाचन आयोग और प्रशासनिक अमले द्वारा चलाए जा रहे SIR अभियान का मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट से दोहरे मतदाताओं, फर्जी नामों और मृतकों की छंटनी कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना था, लेकिन काशीपुर में इस पूरी मुहिम को एक ऐसे खौफनाक और सोचे-समझे षड्यंत्र का औजार बना दिया गया है जिसने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है। दरअसल, आरोप है शहर में एक ऐसा अनाम और रहस्यमयी गिरोह सक्रिय हो चुका है, जो प्रशासनिक व्यवस्था की आड़ लेकर सैकड़ों वैध नागरिकों, विशेषकर एक खास समुदाय के मतदाताओं को निशाना बनाते हुए थोक के भाव फर्जी आपत्तियां दर्ज करा रहा है—हद तो तब हो गई जब कई जिंदा इंसानों को सरकारी दस्तावेजों में ‘मृत’ घोषित कर वोटर लिस्ट से ही गायब करने का खेल शुरू कर दिया गया।
जब बेकसूर लोगों को बेवजह अपने जिंदा होने का सरकारी दफ्तरों में स्पष्टीकरण देना पड़ा, तो आक्रोश का तूफान उठ खड़ा हुआ; इसी क्रम में आज कांग्रेसी नेता अजीज कुरैशी के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में पीड़ित नागरिक न्याय की गुहार लेकर सीधा एसडीएम कार्यालय पहुंचे और एक जोरदार ज्ञापन सौंपा। अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न और रहस्य यह बना हुआ है कि आखिर वो कौन सा अदृश्य और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त गिरोह है जो हर वार्ड में बैठकर लोकतंत्र की जड़ों पर यह दीमक लगा रहा है, और क्या जिला प्रशासन इस साजिश के पीछे छिपे मास्टरमाइंडों का नकाब उतारकर उन पर कठोर दंडात्मक शिकंजा कस पाएगा या फिर असली वोटरों का हक यूं ही कागजी चालबाजियों की बलि चढ़ता रहेगा?



