रायबरेली: NTPC ऊँचाहार में अधर्म पर धर्म की विजय का शंखनाद, दिव्य आतिशबाजी और जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान हुआ प्रांगण
मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का संकल्प; सप्तरंगी छटा और आतिशबाजी ने मोहा मन
रिपोर्ट: नरेंद्र त्रिपाठी
रायबरेली (उत्तर प्रदेश)
रायबरेली। सत्य, धर्म, सदाचार और अक्षुण्ण आस्था का महापर्व विजयादशमी शनिवार को एनटीपीसी ऊँचाहार (NTPC Unchahar) प्रांगण में अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। जैसे ही निशा की काली कालिमा गहराने लगी, राम-रावण युद्ध के पश्चात विशालकाय रावण के पुतले का दहन हुआ और रावण का दंभ से भरा अट्टहास सदा-सदा के लिए शांत हो गया। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने सहस्रों श्रद्धालु जनसमूह के ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी उद्घोष से संपूर्ण परिसर भक्ति रस में सराबोर हो उठा।
स्टेडियम में आयोजित रामलीला के दिव्य मंचन ने दर्शकों को त्रेतायुग की पावन अनुभूति करा दी। प्रभु श्री रामचंद्र जी के बाण छूटते ही अधर्म और असत्य के प्रतीक रावण का विशाल पुतला धू-धू कर जल उठा। इसके साथ ही नभ में हुई अद्भूत एवं आकर्षक आतिशबाजी ने काली अंधेरी रात को सप्तरंगी छटाओं से जगमग कर दिया। बुराई के अंधकार पर अच्छाई के प्रकाश की यह विजय दृश्य अत्यंत मंत्रमुग्ध कर देने वाला था, जिसने उपस्थित जन-जन के हृदय में धर्म की ज्योति प्रज्वलित कर दी।
इस पावन अवसर पर मुख्य अतिथि, एनटीपीसी ऊँचाहार के परियोजना प्रमुख एवं कार्यकारी निदेशक श्री बिस्व मोहन सिंह ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा:
“मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की यह विजयगाथा हमें अपने व्यक्तिगत जीवन और कार्यक्षेत्र में धर्म, सत्य, ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर चलने की अमर प्रेरणा देती है। जिस प्रकार विजयादशमी अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है, ठीक उसी प्रकार एनटीपीसी ऊँचाहार भी राष्ट्र की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा कर ‘विकसित भारत’ के पावन संकल्प को साकार करने हेतु निरंतर प्रतिबद्ध है। आइए, हम सब प्रभु के आदर्शों को अपनाकर राष्ट्र-निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दें।”
महोत्सव को भव्य एवं अनुकरणीय बनाने में एनटीपीसी प्रबंधन, मानव संसाधन विभाग, कर्मचारी यूनियन, कार्यकारी एसोसिएशन तथा पर्व आयोजन समिति 2026–27 के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का समन्वित व सराहनीय योगदान रहा। इस धार्मिक व सांस्कृतिक महोत्सव ने न केवल एनटीपीसी परिवार, बल्कि आसपास के ग्रामीण व सामाजिक जनसमुदाय को भी एकता, प्रेम और सौहार्द के एक पवित्र सूत्र में पिरोने का कार्य किया।
आस्था की पावन ज्योति, सनातन संस्कृति की गरिमा और सामाजिक समरसता के संदेश के साथ संपन्न हुआ विजयादशमी का यह अलौकिक उत्सव प्रत्येक श्रद्धालु के मन में नई सकारात्मक ऊर्जा, धर्म-निष्ठा और आत्म-विश्वास का संचार कर गया।




