Delhi Transport Strike: 21 से 23 मई तक ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल, बाजारों और डिलीवरी सेवाओं पर पड़ेगा असर
राजधानी दिल्ली में 21 से 23 मई तक होने वाली ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का असर अब आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है।
मंडियों से लेकर बड़े बाजारों और ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं तक सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
ट्रांसपोर्ट यूनियनों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत और सरकार द्वारा उनकी मांगों पर ध्यान न दिए जाने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
🥬 फल-सब्जी और किराना बाजारों पर दिख सकता है असर
दिल्ली की आजादपुर मंडी, गाजीपुर मंडी और ओखला सब्जी मंडी जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों में रोजाना हजारों टन फल, सब्जियां और जरूरी सामान ट्रकों के जरिए पहुंचता है।
हड़ताल के दौरान मालवाहक वाहनों की संख्या कम होने से सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
व्यापारियों का कहना है कि अगर ट्रकों की आवाजाही रुकी तो खुदरा बाजारों में सामान देर से पहुंचेगा और कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
गर्मी के मौसम में फल और हरी सब्जियों की मांग ज्यादा रहती है, ऐसे में सप्लाई प्रभावित होने पर आम लोगों को महंगे दाम चुकाने पड़ सकते हैं।
📦 ऑनलाइन डिलीवरी और ई-कॉमर्स पर भी असर संभव
हड़ताल का असर ई-कॉमर्स और ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं पर भी पड़ सकता है।
दिल्ली में रोजाना हजारों पार्सल और घरेलू सामान ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के जरिए अलग-अलग गोदामों तक पहुंचते हैं।
अगर मालवाहक वाहन कम चले तो ग्राहकों को डिलीवरी में देरी का सामना करना पड़ सकता है।
कई कंपनियों ने वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कर दी है ताकि सेवाएं पूरी तरह प्रभावित न हों।
🏪 बड़े बाजारों के व्यापारी भी चिंतित
सदर बाजार, चांदनी चौक, गांधी नगर और करोल बाग जैसे बड़े बाजारों के व्यापारियों ने भी हड़ताल को लेकर चिंता जताई है।
व्यापारियों के अनुसार रोजाना बड़ी मात्रा में माल ट्रकों के जरिए बाजारों तक पहुंचता है।
अगर ट्रांसपोर्ट सेवा प्रभावित हुई तो कारोबार पर सीधा असर पड़ेगा।
⚠️ ट्रांसपोर्ट यूनियनों की क्या हैं मुख्य मांगें?
ऑल इंडिया मोटर्स एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर के मुताबिक ट्रांसपोर्ट यूनियनों की प्रमुख मांगों में:
- दिल्ली आने वाले मालवाहक वाहनों पर बढ़ाया गया पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) वापस लेना
- BS-6 वाहनों को ECC से पूरी तरह छूट देना
- जरूरी सामान लाने वाले वाहनों को राहत देना
- 1 नवंबर 2026 से BS-4 कमर्शियल वाहनों पर प्रस्तावित प्रतिबंध वापस लेना
यूनियनों का कहना है कि बढ़ते शुल्क और नए नियम ट्रांसपोर्ट कारोबार पर भारी आर्थिक बोझ डाल रहे हैं।



