काशीपुर में स्वास्थ्य व्यवस्था तार-तार: नियमों को ताक पर रख करप्शन की बैसाखी पर दौड़ रहे निजी अस्पताल, आयुष्मान योजना के नाम पर सरकारी खजाने में बड़ी सेंध

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काशीपुर में स्वास्थ्य व्यवस्था तार-तार: नियमों को ताक पर रख करप्शन की बैसाखी पर दौड़ रहे निजी अस्पताल, आयुष्मान योजना के नाम पर सरकारी खजाने में बड़ी सेंध

अज़हर मलिक

उधम सिंह नगर जनपद के काशीपुर में स्वास्थ्य का पावन क्षेत्र अब सेवा नहीं, बल्कि पूरी तरह से एक क्रूर और अनैतिक व्यवसाय में तब्दील हो चुका है, जहाँ इंसानी जिंदगियों की कीमत पर चंद रसूखदार अपनी तिजोरियां भर रहे हैं। यहाँ नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे निजी अस्पतालों ने मर्यादाओं की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। सबसे हैरान करने वाला और गंभीर खेल ‘आयुष्मान भारत योजना’ के पैनल में शामिल होने के लिए खेला जा रहा है, जिसमें सुरक्षा मानकों को धता बताकर ‘फायर एनओसी’ (अग्निशमन अनापत्ति प्रमाण पत्र) की बंदरबांट की जा रही है। अस्पताल परिसर में तय मानकों के अनुसार न तो सुरक्षित रास्ते हैं और न ही आपातकालीन सुविधाएं, लेकिन कागजों पर इस कमी को छुपाने के लिए पड़ोस की जमीनों को किराए पर दिखाकर, फर्जी तरीके से रास्ता प्रदर्शित कर अग्निशमन विभाग से एनओसी हासिल कर ली जाती है।

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अग्निशमन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस जानलेवा खेल से आंखें मूंदे बैठे हैं और बिना वास्तविक भौतिक सत्यापन के धड़ल्ले से एनओसी बांट रहे हैं। इसी फर्जीवाड़े के दम पर ये अस्पताल सरकारी योजनाओं के पैनल में शामिल हो जाते हैं और गरीबों के मुफ्त इलाज के नाम पर सरकार के राजस्व को दोनों हाथों से लूटने का काम कर रहे हैं। काशीपुर में ऐसे दर्जनों अस्पताल फल-फूल रहे हैं, जहाँ बुनियादी मानक तक पूरे नहीं हैं, लेकिन स्वास्थ्य महकमा इस महाभ्रष्टाचार पर कार्रवाई के नाम पर केवल फाइलों में खानापूर्ति कर अपनी ड्यूटी का समय काट रहा है। पर्दे के पीछे चल रहा भ्रष्टाचार का यह खेल इतना गहरा है कि उत्तराखंड में आयुष्मान योजना को संचालित करने वाले शीर्ष जिम्मेदार अधिकारी भी इस पर मौन साधे बैठे हैं, जिससे उनकी कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े होते हैं। हद तो तब हो जाती है जब इन तथाकथित अस्पतालों में कोई स्थाई विशेषज्ञ डॉक्टर तक मौजूद नहीं होता और पूरा अस्पताल केवल ‘ऑन कॉल’ डॉक्टरों के भरोसे रामभरोसे चलाया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर जनता की जान से खिलवाड़ करने वाले इन व्यापारियों और डॉक्टरों के गठजोड़ पर नकेल कसने में जिम्मेदार अधिकारी इतने बेबस और सुस्त क्यों दिखाई दे रहे हैं, और क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही इस सोए हुए सिस्टम की नींद टूटेगी?

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