बैलपोखरा तिराहे पर आधी रात का वो खौफनाक सन्नाटा, जिसे चीर कर निकलीं गोलियां और फिर…
मुकेश कुमार
रात के सन्नाटे में जब दुनिया सो रही थी, तब कालाढूंगी-हल्द्वानी रोड का वो तिराहा अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा। 14 फरवरी की उस काली रात को बैलपोखरा जाने वाले रास्ते पर जो कुछ हुआ, उसने पुलिस के रोंगटे खड़े कर दिए।
जब डायल 112 की टीम मौके पर पहुँची, तो वहाँ न कोई घायल था, न कोई हमलावर—सिर्फ बिखरे हुए 13 खोखे चीख-चीख कर किसी बड़ी साजिश की गवाही दे रहे थे। आखिर वो कौन लोग थे जो अंधेरे का फायदा उठाकर गायब हो गए? क्या यह किसी गैंगवार की आहट थी या पुरानी रंजिश का कोई खूनी खेल? पुलिस के पास शुरुआत में सवालों के सिवाय कुछ न था, लेकिन घटनास्थल की बारीकी से हुई वीडियोग्राफी और फॉरेंसिक साक्ष्यों ने एक ऐसी परत खोली जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया।
इस पूरे घटनाक्रम की पटकथा तब साफ होनी शुरू हुई जब बलजीत कौर नाम की महिला ने हिम्मत जुटाकर थाने की चौखट लांघी और तीन नामजद चेहरों से नकाब हटाया। रंजीत, मनदीप और गुरप्रीत—इन नामों के पीछे छिपी दुश्मनी की आग ने उस रात कालाढूंगी को थर्राया था। एसएसपी नैनीताल डॉ. मंजूनाथ टी.सी. ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया और अपनी सबसे तेजतर्रार टीम को मैदान में उतार दिया। पुलिस के रडार पर आए इन शिकारियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया और आखिरकार 20 फरवरी को गडप्पू बैरियर के पास वह सस्पेंस खत्म हुआ, जब घेराबंदी कर तीनों आरोपियों को दबोच लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद जो खुलासा हुआ, उसने इस विवाद की जड़ें खोल दीं। पूछताछ में पता चला कि यह पूरी खूनी जंग लवप्रीत के दोस्त हरभजन और रंजीत सिंह के बीच की पुरानी रंजिश का नतीजा थी। उस रात हरभजन ने रंजीत को मौके पर बुलाया था, लेकिन रंजीत निहत्था नहीं था; वह अपने साथ मौत का सामान लेकर आया था। आरोपियों के पास से बरामद दो अवैध पिस्टल, एक तमंचा और जिंदा कारतूसों ने यह साफ कर दिया कि वे किसी बड़ी वारदात की फिराक में थे। रंजीत का पुराना आपराधिक इतिहास उसकी फितरत को बयां कर रहा था। इस सफल ऑपरेशन के बाद जहाँ अपराधियों के हौसले पस्त हैं, वहीं एसएसपी ने जांबाज पुलिस टीम को 1,500 रुपये के नकद इनाम से नवाज कर यह संदेश दे दिया है कि नैनीताल की धरती पर गुंडागर्दी करने वालों की जगह सिर्फ सलाखों के पीछे है।