वन विभाग की बड़ी कार्रवाई या अपनी ही नाकामी पर पर्दा? 20 लाख की खैर बरामद, पर सवाल—कैसे कटी विभाग की नाक के नीचे से लकड़ी?

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वन विभाग की बड़ी कार्रवाई या अपनी ही नाकामी पर पर्दा? 20 लाख की खैर बरामद, पर सवाल—कैसे कटी विभाग की नाक के नीचे से लकड़ी?

 

दिनेशपुर/रूद्रपुर: तराई केंद्रीय वन प्रभाग की एसओजी और पीपल पड़ाव रेंज की टीम ने रविवार तड़के 3 बजे गदरपुर क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 150 क्विंटल अवैध खैर की लकड़ी से लदा ट्रक तो जब्त कर लिया, लेकिन यह कार्रवाई कई अनसुलझे सवाल छोड़ गई है। 20 लाख की अंतरराष्ट्रीय कीमत वाली यह बेशकीमती लकड़ी जंगलों से कटकर हाईवे तक पहुंच गई, और विभाग को खबर तब लगी जब माल यूपी बॉर्डर पार करने ही वाला था।

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भले ही विभाग इसे अपनी बड़ी कामयाबी बता रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इतनी भारी मात्रा में खैर की लकड़ी आखिर कटी कैसे? क्या वन विभाग के कर्मचारी सो रहे थे या फिर उनकी नाक के नीचे “सफेदपोशों” के इशारे पर यह खेल लंबे समय से चल रहा है? 150 क्विंटल लकड़ी काटने में घंटों का वक्त लगा होगा, फिर भी गश्त करने वाली टीमों को इसकी भनक तक न लगना विभाग की कार्यशैली पर गहरा संदेह पैदा करता है।

 

 

 

 

 

स्थानीय चर्चाओं की मानें तो लकड़ी तस्करों और विभाग के कुछ “काली भेड़ों” के बीच साठगांठ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अगर मुखबिर सूचना न देता, तो शायद यह ट्रक आसानी से उत्तर प्रदेश की मंडियों में पहुंच जाता। क्या यह गतिविधियां लंबे समय से बेखौफ चल रही हैं? तस्करों का अंधेरे का फायदा उठाकर भाग जाना भी पुलिस और वन टीम की घेराबंदी पर सवाल उठाता है।

 

 

 

 

मौके पर एसओजी प्रभारी कैलाश तिवारी और पीपल पड़ाव के वन क्षेत्राधिकारी पुरानचंद जोशी ने बताया कि आरोपियों और सीड प्लांट मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। हालांकि, अधिकारी इस बात का जवाब देने से बचते दिखे कि आखिर लकड़ी तस्करी का यह रूट इतना आसान कैसे बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि विभाग केवल ट्रक पकड़कर इतिश्री कर लेता है या उन जिम्मेदार अधिकारियों पर भी गाज गिरेगी जिनकी लापरवाही से सरकारी संपत्ति को 20 लाख का चूना लगा।

 

 

 

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