बिहार में बड़ा जातीय दांव! सम्राट कैबिनेट में OBC-EBC का दबदबा, निशांत कुमार की एंट्री से बढ़ी सियासी हलचल
पटना: बिहार की राजनीति में अचानक ऐसा बदलाव हुआ है जिसने चुनावी माहौल को पूरी तरह गर्म कर दिया है। नई कैबिनेट के गठन के बाद अब हर तरफ सिर्फ एक ही चर्चा हो रही है—क्या यह टीम बिहार का अगला चुनावी गेमचेंजर साबित होगी? मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की नई सरकार ने सामाजिक समीकरणों पर ऐसा दांव चला है, जिसने विपक्ष की चिंता बढ़ा दी है।
बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने शपथ ले ली है। कुल 32 मंत्रियों वाली इस कैबिनेट में OBC और EBC समुदाय को सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व दिया गया है। भाजपा और जेडीयू ने जातीय संतुलन साधते हुए अलग-अलग वर्गों के नेताओं को शामिल किया है, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव पूरी तरह सामाजिक समीकरणों के आधार पर लड़ा जाएगा।
नई कैबिनेट में पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग सबसे मजबूत नजर आ रहा है। खुद सम्राट चौधरी कोइरी समाज से आते हैं, जबकि डिप्टी सीएम पदों पर भूमिहार और यादव समाज को प्रतिनिधित्व देकर बड़ा राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। राजनीतिक जानकार इसे बिहार की नई सोशल इंजीनियरिंग बता रहे हैं।
सवर्ण समाज से विजय कुमार सिन्हा, मिथिलेश तिवारी और संजय टाइगर जैसे नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। वहीं दलित समाज से लखेंद्र पासवान और नंद किशोर राम को शामिल कर सरकार ने बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। महिला प्रतिनिधित्व के तौर पर श्रेयसी सिंह को मंत्री बनाए जाने की भी काफी चर्चा हो रही है।
निशांत कुमार की एंट्री से बढ़ी राजनीतिक हलचल
इस नई कैबिनेट में सबसे ज्यादा चर्चा जेडीयू नेता निशांत कुमार को लेकर हो रही है। नीतीश कुमार के बेटे और कुर्मी समाज से आने वाले निशांत कुमार को मंत्री बनाए जाने को भविष्य की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे जेडीयू का बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
इसके अलावा श्रवण कुमार, भगवान सिंह कुशवाहा, मदन सहनी और बुलो मंडल जैसे नेताओं को शामिल कर जेडीयू ने अलग-अलग जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है। वहीं दलित समाज से अशोक चौधरी, सुनील कुमार और रत्नेश सदा को जगह देकर पार्टी ने अपना मजबूत सामाजिक संदेश देने का प्रयास किया है।
सहयोगी दलों को भी मिला बड़ा हिस्सा
एनडीए के सहयोगी दलों को भी सरकार में अहम हिस्सेदारी दी गई है। एलजेपी (रामविलास) से संजय पासवान और संजय सिंह को मंत्री बनाया गया है। वहीं हम पार्टी से संतोष मांझी को कैबिनेट में शामिल किया गया है। आरएलएम की तरफ से दीपक प्रकाश को मंत्री बनाकर गठबंधन की मजबूती का संदेश दिया गया है।
अब बिहार की राजनीति में सबकी नजर इस बात पर है कि सामाजिक संतुलन पर आधारित यह नई कैबिनेट आगामी चुनाव में कितना असर दिखाती है।

