मेरठ में अगस्त में खुलेगा अखिलेश का चुनावी कार्ड, सर्वे के आधार पर तय होंगे टिकट

मेरठ में अगस्त में खुलेगा अखिलेश का चुनावी कार्ड, सर्वे के आधार पर तय होंगे टिकट
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मेरठ में अगस्त में खुलेगा अखिलेश का चुनावी कार्ड, सर्वे के आधार पर तय होंगे टिकट

Uttar Pradesh में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पश्चिमी यूपी की सबसे अहम सीटों में शामिल Meerut में समाजवादी पार्टी ने अभी से चुनावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि अगस्त महीने में Akhilesh Yadav मेरठ को लेकर बड़ा फैसला ले सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक समाजवादी पार्टी इस बार टिकट वितरण में नया फॉर्मूला अपनाने जा रही है। पार्टी की ओर से आंतरिक सर्वे कराया जा रहा है, जिसमें यह देखा जाएगा कि कौन प्रत्याशी किस सीट पर सबसे मजबूत स्थिति में है और जीत दर्ज कर सकता है। इसी सर्वे को टिकट का मुख्य आधार बनाया जाएगा।

बताया जा रहा है कि मेरठ की सातों विधानसभा सीटों — मेरठ शहर, मेरठ दक्षिण, मेरठ कैंट, किठौर, हस्तिनापुर, सरधना और सिवालखास — पर दावेदारों के बीच जबरदस्त खींचतान चल रही है। संभावित उम्मीदवारों की सूची लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय तक पहुंच चुकी है।

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पुराने चेहरों पर भरोसा या नए चेहरों की एंट्री?

सपा के कई पुराने दिग्गज नेता एक बार फिर टिकट की दौड़ में शामिल हैं। पार्टी के अंदर चर्चा है कि अधिकांश सीटों पर अनुभवी नेताओं को मौका मिल सकता है, लेकिन एक-दो सीटों पर नए चेहरे भी उतारे जा सकते हैं।

मेरठ दक्षिण सीट को लेकर सबसे ज्यादा असमंजस बना हुआ है। पिछली बार यहां से आदिल चौधरी चुनाव लड़े थे, लेकिन भाजपा नेता सोमेंद्र तोमर से हार गए थे।

हस्तिनापुर और सिवालखास सीट पर बढ़ी हलचल

Hastinapur सीट पर पूर्व मंत्री प्रभुदयाल वाल्मीकि, पूर्व विधायक योगेश वर्मा, दीपू मनोठिया और प्रशांत गौतम मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं।

वहीं Siwalkhas सीट पर सम्राट मलिक, गौरव चौधरी, नदीम चौहान और वसीम राजा के नाम चर्चा में हैं। पिछली बार यहां सपा-रालोद गठबंधन के उम्मीदवार गुलाम मोहम्मद ने जीत दर्ज की थी।

मेरठ कैंट सीट को लेकर भी सियासी चर्चाएं तेज हैं। पार्टी के अंदर माना जा रहा है कि अगर सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन होता है, तो यह सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है।

मेरठ से तय होगा पश्चिम यूपी का समीकरण

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मेरठ की सात सीटों का असर पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति पर पड़ता है। यही वजह है कि Samajwadi Party टिकट वितरण में कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहती।

अब सबकी नजर अगस्त महीने पर टिकी है, जब यह साफ होगा कि अखिलेश यादव किन चेहरों पर भरोसा जताकर चुनावी मैदान में उतारते हैं।

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