सियासी हलचल या गुलाल का चक्रव्यूह? विनय यादव की एक दस्तक और थम गया भदोखर!

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सियासी हलचल या गुलाल का चक्रव्यूह? विनय यादव की एक दस्तक और थम गया भदोखर!

नरेंद्र त्रिपाठी

सैकड़ों कदम एक साथ एक ही दिशा में बढ़ रहे थे, चेहरे गुलाल से नहीं बल्कि एक अजीब सी उत्सुकता से रंगे थे और हवाओं में उड़ता अबीर किसी बड़े बदलाव या फिर किसी महाजश्न की गवाही दे रहा था। रायबरेली के भदोखर थाना क्षेत्र का बेला भेला मैदान कल किसी रणक्षेत्र जैसा प्रतीत हो रहा था, लेकिन वहां हथियार नहीं बल्कि लोक-संस्कृति की थाप और फाग के सुर गूंज रहे थे। हर कोई यह जानने को बेताब था कि ग्राम प्रधान विनय यादव की इस एक पुकार पर आखिर पूरा इलाका क्यों उमड़ पड़ा है। यह केवल रंगों का त्योहार नहीं था, बल्कि रसूख और रिश्तों के मिलन का वो केंद्र बन गया था, जिसकी चर्चा अब समूचे जनपद की गलियों में हो रही है।

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इस भव्य आयोजन की जमीन जब तैयार हुई, तो हजारों की तादाद में पहुंचे युवाओं और बुजुर्गों के हुजूम ने यह साबित कर दिया कि परंपराएं आज भी आधुनिकता पर भारी हैं। कार्यक्रम के सूत्रधार ग्राम प्रधान विनय यादव ने जिस आत्मीयता से इस समागम को पिरोया, उसने राजनीतिक और सामाजिक दूरियों को किनारे कर दिया। मंच की गरिमा तब और बढ़ गई जब पूर्व एमएलसी रामनरेश यादव उर्फ ‘मिनी’ और राज्यसभा सांसद राम सिंह राणा ने अपनी मौजूदगी से कार्यक्रम के वजन को दोगुना कर दिया। वहीं, यूट्यूब की दुनिया के जाने-माने सितारे गायक विकास यादव और विकास निषाद के गीतों ने फिजां में वो रंग घोला कि लोग अपनी सुध-बुध भूलकर होली के फाग पर झूमने को मजबूर हो गए।

 

 

महोत्सव का आलम यह था कि बेला भेला की मिट्टी फाग के तरानों से सराबोर हो उठी और देर शाम तक हंसी-ठिठोली के बीच गुलाल के बादल आसमान छूते रहे। आयोजक विनय यादव ने न केवल एक सफल मेजबानी की, बल्कि रायबरेली की सांस्कृतिक विरासत को एक नए कलेवर में पेश कर यह दिखा दिया कि जब सरोकार साझा हों, तो भीड़ खुद-ब-खुद कारवां बन जाती है

 

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