पश्चिम यूपी में चंद्रशेखर की नई चाल! क्या हस्तिनापुर से बदलेगा 2027 का पूरा खेल?
उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से शतरंज बिछनी शुरू हो गई है। पश्चिमी यूपी में इस बार मुकाबला सिर्फ भाजपा, सपा और बसपा तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि नगीना सांसद Chandrashekhar Azad की एंट्री ने पूरे राजनीतिक समीकरण को हिला दिया है। चर्चा तेज है कि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) मेरठ की सभी सात विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती है, जबकि खुद चंद्रशेखर आजाद “भाग्यशाली” मानी जाने वाली हस्तिनापुर सीट से चुनावी ताल ठोक सकते हैं।
हस्तिनापुर सीट को यूपी की राजनीति में सत्ता का रास्ता माना जाता है। लंबे समय से यह चर्चा रही है कि जो दल यहां जीतता है, वही लखनऊ की सत्ता तक पहुंचता है। ऐसे में अगर चंद्रशेखर आजाद यहां से मैदान में उतरते हैं तो यह सिर्फ चुनाव नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक संदेश माना जाएगा।
बसपा की बढ़ सकती है मुश्किल
मेरठ, सहारनपुर और आसपास के इलाकों में दलित युवाओं के बीच चंद्रशेखर आजाद की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। खासकर युवा मतदाता उन्हें एक आक्रामक और जमीन से जुड़ा चेहरा मान रहे हैं। यही वजह है कि सबसे बड़ा खतरा बहुजन समाज पार्टी को माना जा रहा है। अगर दलित वोट बैंक में बंटवारा हुआ तो बसपा के पारंपरिक समीकरण कमजोर पड़ सकते हैं।
सपा के PDA फार्मूले पर भी असर
समाजवादी पार्टी पश्चिमी यूपी में PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण के सहारे भाजपा को घेरने की तैयारी में है। लेकिन अगर दलित वोटों का बड़ा हिस्सा आसपा की तरफ गया तो सपा की रणनीति को झटका लग सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चंद्रशेखर का अलग चुनाव लड़ना विपक्षी वोटों में बिखराव पैदा कर सकता है।
भाजपा की भी बढ़ी टेंशन
भाजपा भी पिछले कुछ वर्षों में दलित वोट बैंक में मजबूत पकड़ बनाने का दावा करती रही है। ऐसे में आसपा की सक्रियता भाजपा के लिए भी चिंता का विषय बन सकती है। मेरठ कैंट, मेरठ दक्षिण, किठौर और सिवालखास जैसी सीटों पर नए समीकरण बनने लगे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक बड़े दल अब अपनी रणनीति दोबारा तैयार करने में जुट गए हैं।
मुस्लिम वोटों में बिखराव की आशंका
सरधना सीट से शाहजेब रसूलपुर और शहर सीट से बदर अली जैसे नामों की चर्चा ने सपा की चिंता बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि मुस्लिम मतदाताओं का एक हिस्सा आसपा की ओर जा सकता है। इससे सपा के पारंपरिक वोट बैंक पर असर पड़ सकता है।
मेरठ शहर में बन सकता है त्रिकोणीय मुकाबला
मेरठ शहर सीट पर अब तक मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और सपा के बीच माना जाता रहा है, लेकिन बदर अली की सक्रियता ने इस सीट को दिलचस्प बना दिया है। स्थानीय युवाओं के बीच उनकी पकड़ और मुस्लिम समाज में बढ़ती चर्चा के कारण यहां त्रिकोणीय संघर्ष की संभावना दिखाई दे रही है।
2027 में पश्चिम यूपी बनेगा सबसे बड़ा रणक्षेत्र?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर आजाद समाज पार्टी पूरी ताकत के साथ पश्चिमी यूपी में उतरती है तो 2027 का चुनाव कई दिग्गजों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। खासकर मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और बिजनौर बेल्ट में आसपा “किंगमेकर” की भूमिका निभा सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या चंद्रशेखर आजाद वास्तव में हस्तिनापुर से चुनाव लड़ेंगे या यह सिर्फ राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है।



