Uttarakhand Politics: मसूरी सीट पर बढ़ी भाजपा की टेंशन! पूर्व मंत्री दिनेश अग्रवाल ने भी ठोकी दावेदारी
उत्तराखंड की राजनीति में चुनावी हलचल तेज हो चुकी है, लेकिन इस बार सबसे ज्यादा नजरें जिस सीट पर टिक गई हैं, वह है मसूरी विधानसभा सीट।
भाजपा के लिए यह सीट अब आसान नहीं दिख रही। वजह सिर्फ विपक्ष नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर बढ़ती दावेदारियों ने भी राजनीतिक समीकरण बदलने शुरू कर दिए हैं।
अब पूर्व मंत्री दिनेश अग्रवाल के बयान ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
भाजपा नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती?
मसूरी विधानसभा से वर्तमान में गणेश जोशी लगातार तीसरी बार विधायक हैं और सरकार में मंत्री भी हैं।
इसके बावजूद सीट पर दावेदारों की लंबी कतार भाजपा नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा रही है।
अब कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व मंत्री दिनेश अग्रवाल ने भी मसूरी सीट से चुनाव लड़ने के संकेत देकर राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है।
अग्रवाल का कहना है कि “मसूरी मेरे लिए नई सीट नहीं है, वहां मेरा घर रहा है।”
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल मसूरी और धर्मपुर में वैकेंसी नहीं है, लेकिन यदि पार्टी मौका देती है तो वह चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।
55 साल कांग्रेस में रहे, अब भाजपा में क्यों आए?
दिनेश अग्रवाल ने कांग्रेस छोड़ने के पीछे कई बड़े कारण बताए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में अब सम्मान की संस्कृति खत्म हो चुकी थी।
पार्टी में परिवारवाद हावी हो गया था और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी होने लगी थी।
उन्होंने कहा कि शीर्ष नेतृत्व से मिलने के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था, जबकि भाजपा में उन्हें सम्मान मिला।
अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता की भी जमकर तारीफ की।
धामी की तारीफ में क्या बोले अग्रवाल?
पूर्व मंत्री ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को बेहद ऊर्जावान नेता बताते हुए कहा कि उनमें काम करने की अद्भुत क्षमता है।
उन्होंने कहा कि धामी लगातार राज्य के विकास के लिए सक्रिय रहते हैं और यही बात उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित करती है।
अग्रवाल ने कहा कि भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें शीर्ष नेतृत्व से पूरा सम्मान मिला और अब वह पार्टी के लिए पूरी तरह समर्पित हैं।
क्या मसूरी सीट पर बदलेगा भाजपा का चेहरा?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मसूरी सीट पर भाजपा के भीतर बढ़ती दावेदारियां आने वाले चुनाव में बड़ा समीकरण बना सकती हैं।
अगर पार्टी नए चेहरे पर दांव लगाती है तो यह फैसला पूरे उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा संदेश देगा।
फिलहाल भाजपा नेतृत्व के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पार्टी एक बार फिर गणेश जोशी पर भरोसा जताएगी या फिर किसी नए चेहरे को मौका मिलेगा?



