Farji doctor : झोलाछाप चिकित्सकों की लापरवाही से जच्चा महिला की मौत मामले में मृतका के भाई ने मुख्यमंत्री से की कार्यवाही की मांग
यामीन विकट
Thakurdwara news : तीन दिन पूर्व झोला छाप चिकित्सकों द्वारा चलाये जा रहे फ़र्ज़ी अस्पताल में भारी लापरवाही से प्रसव पीड़ा के बाद भर्ती की गई महिला की जान चली गई थी।
मंगलवार को इस मामले में मृतका के भाई ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर झोलाछाप चिकित्सक के विरुद्ध कार्यवाही की मांग करते हुए उक्त फ़र्ज़ी अस्पताल को सील कराये जाने की मांग की है।
नगर के तिकोनिया बस स्टैंड के पास नूर करीम होटल के निकट स्थित हंस हॉस्पिटल में बीते शनिवार को उस समय खासा हंगामा शुरू हो गया जब प्रसव पीड़ा के बाद निकटवर्ती ग्राम मानपुर दत्तराम निवासी इंद्रेश शर्मा की पत्नी प्रियंका शर्मा की झोलाछाप चिकित्सको के इलाज में बरती गई लापरवाही के कारण मौत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार गर्भवती प्रियंका को प्रसव पीड़ा होने पर उक्त फ़र्ज़ी अस्पताल में बीती दो अगस्त को भर्ती कराया गया था।
परिजनों के अनुसार उसकी हालत बिल्कुल सामान्य थी लेकिन जैसे जैसे अस्पताल के फ़र्ज़ी चिकित्सकों ने उसका इलाज शुरू किया तो हालत खराब होती चली गई और लगभग 24 घण्टे के बाद जब उसकी हालत बेहद गम्भीर हो गई तो झोलाछापो ने हाथ खड़े कर दिए और तब महिला को बाहर ले जाने की सलाह देकर अपना पीछा छुड़ा लिया। परेशान परिजन गर्भवती महिला को अलग अलग कई अस्पतालों में लिए घूमते रहे लेकिन शनिवार की सुबह एक अन्य अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
इस बात से गुस्साए मृतका के परिजन प्रियंका के शव को लेकर हंस हॉस्पिटल में पँहुच गए जंहा परिजनों ने जमकर हंगामा करते हुए चिकित्सकों पर घोर लापरवाही के आरोप लगाते हुए अस्पताल के चिकित्सकों पर कार्यवाही की मांग की थी। घटना की सूचना पर कोतवाली पुलिस भी मौके पर जा पँहुची थी। उधर अस्पताल में हंगामा शुरू होने से पहले ही झोलाछाप चिकित्सक मोके से भाग गए थे।
बताते चलें कि नगर में खुले इन दर्जनों फ़र्ज़ी अस्पतालों में अनेक लोगो की पहले भी मौतें हो चुकी हैं। यदि कार्यवाही की बात करें तो कई बार जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा छापेमारी कर इन अस्पतालों को अनेक बार सील किया जाता रहा है लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि कुछ दिन के बाद ही इन सभी अस्पतालों को फिर से खुलवा दिया जाता है लेकिन इनपर कभी कोई ठोस कार्यवाही नहीं की जाती है बस छापेमारी कर इन्हें चार छह दिन के लिए बन्द कर दिया जाता है और फिर इन्हें लोगो की जान से खेलने का सर्टिफिकेट दे दिया जाता है।
स्वास्थ्य विभाग के इस रवैय्ये को लेकर नगर में अब इस तरह की चर्चाओं ने भी जोर पकड़ लिया है कि इन फ़र्ज़ी अस्पतालों से और झोलाछाप चिकित्सकों से एक तय शुदा रकम हर माह वसूली जाती है और फिर यही फ़र्ज़ी अस्पताल दूध के धुले मान लिए जाते हैं। मामला कुछ भी हो लेकिन जिस प्रियंका शर्मा की जान इन झोलाछापो ने ली है उसकी शादी अभी दो साल पहले ही हुई थी और वह पहली बार ही किसी बच्चे को जन्म देने वाली थी।
अब मृतका के भाई सत्यप्रकाश शर्मा ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर हंस अस्पताल पर गम्भीर आरोप लगाते हुए अस्पताल के झोलाछाप चिकित्सकों के विरुद्ध कार्यवाही करने की मांग के साथ ही अस्पताल को सील किये जाने की भी मांग की है। देखना होगा कि इतना कुछ होने के बाद भी इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की कुम्भकर्णी नींद खुलती है या नहीं।