नौकरशाही की ‘नवाबी’ के आगे बेअसर पीएम-सीएम की अपील! कॉर्बेट पार्क के डायरेक्टर की ठंडी गाड़ी के लिए धू-धू कर जल रहा देश का ईंधन
अज़हर मलिक
एक तरफ जहां वैश्विक संकट के दौर में देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने के लिए देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार ईंधन और ऊर्जा बचाने की मुहिम चला रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रामनगर से सरकारी तंत्र की संवेदनशीलता पर सवाल उठाती एक बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जहां ईंधन बचाने के लिए खुद अपने काफिले में 50 फीसदी की कटौती कर दी और अधिकारियों को ‘नो व्हीकल डे’ अपनाने की नसीहत दी, वहीं रामनगर में बैठे जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के डायरेक्टर डॉ. साकेत बडोला के दफ्तर के बाहर इन अपीलों की हवा निकलती दिखाई दे रही है। देश और राज्य में ईंधन बचाने की जंग कितनी ही नाजुक मोड़ पर क्यों न हो, लेकिन साहब की ‘नवाबी’ में रत्ती भर भी कमी नहीं आनी चाहिए।
गाड़ी को ठंडा करने के लिए पहले से स्टार्ट रखना किसी भी स्थिति में न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। गाड़ी स्टार्ट करने के बाद तुरंत शीशे नीचे करके कुछ मीटर चलने से भी गाड़ी की गर्म हवा बाहर निकल जाती है और एसी तुरंत काम करने लगता है—यही सही और समझदारी भरा तरीका है।
रामनगर से सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक, कॉर्बेट पार्क के डायरेक्टर डॉ. साकेत बडोला के दफ्तर से निकलने से पहले ही उनके निर्देश पर सरकारी गाड़ी को स्टार्ट कर दिया जाता है। साहब के दफ्तर में रहने के दौरान ही ड्राइवर द्वारा गाड़ी को कई मिनटों तक बेवजह स्टार्ट मोड पर रखा जाता है, ताकि अंदर लगे एयर कंडीशनर (AC) से गाड़ी पूरी तरह ठंडी और आरामदायक हो जाए।
जब गाड़ी का तापमान साहब के ‘शाही मिजाज’ के मुताबिक बिल्कुल ठंडा हो जाता है, तब साहब दफ्तर से निकलकर उसमें विराजमान होते हैं और अपनी यात्रा पर रवाना होते हैं। सवाल यह उठता है कि जिस प्रदेश के मुख्यमंत्री आम जनता से ‘मेरा भारत, मेरा योगदान’ के तहत वीआईपी कल्चर छोड़ने और देशहित में ईंधन बचाने का आह्वान कर रहे हों, वहां खुद जिम्मेदार नौकरशाही ही सरकारी संसाधनों का इस तरह उपयोग कर रही है। ठंडी गाड़ी में बैठने के इस रसूखदार शौक के आगे पर्यावरण संरक्षण के दावों और सरकार की मितव्ययता की अपीलों को पूरी तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।



