बरेली में अल्ट्रासाउंड सेंटर रजिस्ट्रेशन में एक और खेल, नियमों को ठेंगा दिखाकर दी मंजूरी, नोडल प्रभारी डॉ लईक अहमद नियमों को कर रहे दरकिनार, कागजी हेराफेरी के सहारे नए निजी सेंटर को दे दी मंजूरी
शानू कुमार ब्यूरो उत्तर प्रदेश
बरेली में निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों के रजिस्ट्रेशन को लेकर पहले से उठ रहे सवालों के बीच अब एक और नया मामला सामने आया है। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर एक और निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर का पंजीकरण कर दिया गया है। इस पूरे प्रकरण में नोडल प्रभारी डॉ लईक अहमद की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, संबंधित सेंटर के रजिस्ट्रेशन में जरूरी मानकों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। कागजों में सब कुछ सही दिखाकर फाइल पास करा दी गई, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि स्थानीय डॉक्टर की अनिवार्यता जैसे नियमों को नजरअंदाज करते हुए बाहरी या अपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर अनुमति दे दी गई।
गौरतलब है कि पहले भी बरेली में कई अल्ट्रासाउंड सेंटरों के रजिस्ट्रेशन को लेकर गड़बड़ियों के आरोप लग चुके हैं। आरोप यह भी हैं कि कई सेंटर कागजी डॉक्टरों के नाम पर संचालित हो रहे हैं, जिनकी वास्तविक मौजूदगी संदिग्ध है।
स्वास्थ्य विभाग के अंदरखाने चर्चा है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो ऐसे कई और मामलों का खुलासा हो सकता है, जहां नियमों की अनदेखी कर सेंटरों को मंजूरी दी गई है। इस नए मामले ने एक बार फिर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।



