सील बिल्डिंग में ‘अस्पताल’ का खेल, सच लिखने पर पत्रकार को CMO दफ्तर में मिली मौत की धमकी
शानू कुमार ब्यूरो उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के बरेली में स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की सरपरस्ती में भ्रष्टाचार का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसने पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह मामला केवल कागजी हेराफेरी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक निर्भीक पत्रकार की सुरक्षा और कानून के राज पर सीधा हमला है। सरकारी फाइलों में जिस इमारत को प्रशासन ने अपनी मुहर से सील किया था, उसी बंद कमरे के भीतर भ्रष्ट तंत्र ने नियमों को ताक पर रखकर एक नए अस्पताल को फलने-फूलने की अनुमति दे दी।
प्रकरण के अनुसार, फर्जीवाड़े के आरोप में सील किए गए ‘खुसरो हॉस्पिटल’ के भवन में ही ‘अन्नपूर्णा हॉस्पिटल’ का नया पंजीकरण कर दिया गया। यह प्रशासनिक जादूगरी बिना मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय के शीर्ष अधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं थी। सरकारी रिकॉर्ड में आज भी वह भवन सील दर्ज है, लेकिन धरातल पर वहां बेखौफ तरीके से नया कारोबार के संचालन की शुरुआत हो चुकी थी। यह सीधे तौर पर शासन की आंखों में धूल झोंकने और माफिया तंत्र को संरक्षण देने का गंभीर मामला है।
जब इस संगठित भ्रष्टाचार की परतें पत्रकार कामरान अली ने अपने समाचार पत्र के माध्यम से खोलीं, तो बौखलाए अस्पताल संचालक ने गुंडागर्दी का रास्ता अख्तियार कर लिया। आरोप है कि CMO कार्यालय के भीतर ही पत्रकार को सार्वजनिक रूप से अपमानित कर जान से मारने की धमकी दी गई। एक सरकारी परिसर के भीतर पत्रकार पर हमला करने की कोशिश यह दर्शाती है कि दोषियों के मन में न तो कानून का डर है और न ही प्रशासन का।
अब यह मामला उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की दहलीज तक पहुंच चुका है। पीड़ित पत्रकार ने अपनी और अपने परिवार की जान को खतरा बताते हुए दोषी अधिकारियों और हमलावर अस्पताल संचालक के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। इस खुलासे ने बरेली स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है कि आखिर किसके इशारे पर एक ‘तालाबंद’ इमारत में मौत और जिंदगी का व्यापार करने की अनुमति दी गई?
वहीं पत्रकार ने सीएमओ बरेली, संबंधित नोडल अधिकारी, शेर अली जाफरी और सलमान खान से खतरा बताया है और दावा किया है कि भविष्य में कोई घटना घटित होती है तो उसके जिम्मेदार यही लोग होंगे।



