आसमानी आफत और बिजली विभाग की बेरहमी: काशीपुर में बूंद-बूंद आराम को तरसती जनता, आंख-मिचौली के खेल ने ठप किया कारोबार!
अज़हर मलिक
भीषण और जानलेवा गर्मी के इस दौर में जहाँ एक तरफ प्रकृति ने अपना प्रचंड रूप दिखा रखा है, वहीं दूसरी तरफ बिजली विभाग का गैर-जिम्मेदाराना रवैया आम जनता के लिए जी का जंजाल बन चुका है। सूरज ने आसमान से आग बरसाते हुए अपना आतंक मचा रखा है, चिलचिलाती धूप और झुलसा देने वाली लू ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, लेकिन इस भयंकर आपदा के बीच काशीपुर की जनता को राहत देने के बजाय बिजली विभाग उनके जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहा है
। शहर में बिजली की स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि कभी वोल्टेज का अता-पता नहीं रहता, तो कभी बिजली महज कुछ मिनटों के मेहमान की तरह आती और पलक झपकते ही गायब हो जाती है। चौबीस घंटे चल रहा बिजली का यह लुकाछिपी और आंख-मिचौली का खेल अब लोगों के सब्र का बांध तोड़ रहा है। इस अंधेरगर्दी के कारण स्थानीय व्यापारियों और बिजली पर निर्भर रहने वाले कारोबारियों की कमर पूरी तरह टूट चुकी है, दुकानों में रखे फ्रीज और ठंडे उपकरण शोपीस बनकर रह गए हैं, जिससे भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। घर हो या बाजार, इस उमस भरी गर्मी में लोग चैन की एक सांस तक नहीं ले पा रहे हैं। सबसे ज्यादा हृदयविदारक स्थिति मासूम बच्चों और बेबस बुजुर्गों की है,
जो इस तड़पा देने वाले मौसम में बिना बिजली के तड़पने को मजबूर हैं। रात-रात भर लोग जागकर काटने को विवश हैं क्योंकि न तो पंखे हवा दे रहे हैं और न ही कोई सुनने वाला है। एक तरफ कुदरत का कहर और दूसरी तरफ बिजली विभाग का यह अमानवीय सितम— ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर काशीपुर की बेकसूर जनता इस जानलेवा गर्मी से राहत पाने के लिए करे तो क्या करे और जाए तो कहाँ जाए?



