कानपुर में खाकी बनाम सेना! ITBP जवानों ने कमिश्नर ऑफिस घेरा, CMO को भी साथ ले गए

कानपुर में खाकी बनाम सेना! ITBP जवानों ने कमिश्नर ऑफिस घेरा, CMO को भी साथ ले गए
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कानपुर में खाकी बनाम सेना! ITBP जवानों ने कमिश्नर ऑफिस घेरा, CMO को भी साथ ले गए

कानपुर में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया जब आईटीबीपी (ITBP) के करीब 100 जवान पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। मामला आईटीबीपी जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी का है, जिनका कथित तौर पर डॉक्टरों की लापरवाही के चलते हाथ काटना पड़ा। जवानों ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग और पुलिस डॉक्टरों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

15 से ज्यादा गाड़ियां लेकर पहुंचे जवान

शनिवार सुबह करीब 11:15 बजे आईटीबीपी के जवान कई गाड़ियों और ट्रकों के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे। जवानों ने पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल और अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था डॉ. विपिन कुमार ताडा से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की।

बताया जा रहा है कि मुलाकात के बाद आईटीबीपी के जवानों की 5 से 6 गाड़ियां सीधे सीएमओ कार्यालय पहुंचीं और सीएमओ को भी अपने साथ लेकर वापस कमिश्नर ऑफिस आ गए। इस पूरे घटनाक्रम से प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई।

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डॉक्टरों की लापरवाही से मां का हाथ काटने का आरोप

आईटीबीपी जवान विकास सिंह का आरोप है कि 13 मई की शाम सांस लेने में दिक्कत होने पर उन्होंने अपनी मां निर्मला देवी को कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। भर्ती के करीब 12 घंटे बाद उनकी मां के दाहिने हाथ में सूजन आ गई।

परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने सूजन को सामान्य बताते हुए नजरअंदाज किया। हालत बिगड़ने पर विकास सिंह ने अपनी मां को 14 मई की शाम पारस हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने हाथ में गंभीर संक्रमण बताया।

स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी कि 17 मई को डॉक्टरों को निर्मला देवी का हाथ काटना पड़ा।

“दो दिन तक पुलिस के चक्कर काटे”

विकास सिंह का कहना है कि उन्होंने रेलबाजार थाना और एसीपी कार्यालय के कई चक्कर लगाए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद वह अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे थे, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया।

पुलिस कमिश्नर ने सीएमओ को जांच कर स्पष्ट रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे।

“संभावनाओं नहीं, स्पष्ट रिपोर्ट दें” – पुलिस कमिश्नर

शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय की रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर को सौंपी गई, लेकिन रिपोर्ट में “संभावनाओं” के आधार पर बातें कही गईं। इस पर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने नाराजगी जताते हुए कहा कि रिपोर्ट स्पष्ट होनी चाहिए और दोष तय कर अभियोग दर्ज करने की संस्तुति दी जाए।

इसी बात को लेकर शनिवार को आईटीबीपी जवान फिर कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए और डॉक्टरों को बचाने का आरोप लगाया।

प्रशासन पर बढ़ा दबाव

आईटीबीपी जवानों के इस विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर भारी दबाव बन गया है। पूरे मामले में अब विस्तृत जांच और डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

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