एक बेटी का दर्द, मां-बाप का संघर्ष और अधूरे सवाल! अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए रामनगर में पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत ने बुलंद कि आवाज।
चार साल से न्याय की आस लगाए बैठा एक परिवार, एक बेटी की दर्दनाक मौत और अब भी अनुत्तरित सवाल—आखिर अंकिता भंडारी पर कथित तौर पर वीवीआईपी को सेवाएं देने का दबाव किसके लिए बनाया गया था? वह वीवीआईपी कौन था, जिसका नाम आज भी सार्वजनिक बहस के केंद्र में है? अंकिता हत्याकांड में दोषियों को सजा मिलने के बावजूद यह सवाल न्याय की मांग के साथ लगातार उठ रहा है।
उत्तराखंड के पौड़ी जिले में सितंबर 2022 में सामने आए अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। ऋषिकेश के निकट वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता 18 सितंबर 2022 को लापता हुई और 24 सितंबर को उसका शव चीला बैराज से बरामद हुआ। मामले में रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो साथियों को गिरफ्तार किया गया। 30 मई 2025 को कोटद्वार की अदालत ने तीनों को हत्या और साक्ष्य मिटाने के अपराध में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद अभियुक्तों ने उच्च न्यायालय में अपील की, जबकि उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं। अपील पर अंतिम निर्णय की स्थिति संबंधित न्यायालय के नवीनतम रिकॉर्ड से स्पष्ट की जानी चाहिए।

सजा के बाद भी वीवीआईपी का सवाल क्यों कायम है?
अंकिता के माता-पिता वीरेंद्र भंडारी और सोनी देवी की मांग है कि उनकी बेटी को न्याय मिले और मामले से जुड़े अनुत्तरित सवालों की निष्पक्ष जांच हो। वीवीआईपी का मुद्दा इस मामले में लंबे समय से सार्वजनिक चर्चा और राजनीतिक विवाद का विषय रहा है। उत्तराखंड सरकार ने परिजनों के अनुरोध पर मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की घोषणा की थी। अब सवाल यह है कि जांच में इस पहलू पर क्या तथ्य सामने आए और पीड़ित परिवार को उन सवालों के जवाब कब मिलेंगे, जो आज भी न्याय की मांग को जीवित रखे हुए हैं।
रामनगर में कैंडल मार्च, न्याय की मांग को लेकर कांग्रेस ने बुलंद की आवाज
अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर बृहस्पतिवार शाम रामनगर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत के नेतृत्व में कैंडल मार्च निकाला। कांग्रेस कार्यालय से शुरू हुआ मार्च रानीखेत रोड तक पहुंचा। हाथों में जलती मोमबत्तियां लेकर निकले कार्यकर्ताओं ने अंकिता के परिजनों के संघर्ष के प्रति समर्थन जताया और महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान तथा न्याय की मांग को प्रमुखता से उठाया।
पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत ने दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने का विरोध जताते हुए कहा कि कांग्रेस अंकिता भंडारी के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए प्रदेशभर में आवाज उठा रही है। उन्होंने बताया कि अंकिता के माता-पिता दिल्ली के इंडिया गेट पर धरना देकर न्याय की मांग कर रहे हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इंडिया गेट पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की और उनके संघर्ष को समर्थन दिया।
सवाल सिर्फ सजा का नहीं, हर अनुत्तरित सवाल के जवाब का भी है।अंकिता अपने पैरों पर खड़े होकर परिवार का सहारा बनना चाहती थी, लेकिन उसकी जिंदगी छिन गई। आज उसके माता-पिता की न्याय की लड़ाई केवल एक परिवार का संघर्ष नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, सत्ता और प्रभाव से जुड़े सवालों की निष्पक्ष जांच तथा न्याय व्यवस्था में जनविश्वास से भी जुड़ी है। रामनगर का कैंडल मार्च इसी मांग की गूंज बना—दोषियों को सजा मिलने के साथ-साथ मामले के शेष सवालों का जवाब भी सामने आना चाहिए, ताकि अंकिता के परिवार को न्याय के लिए दर-दर भटकना न पड़े।
कैंडल मार्च में नगर अध्यक्ष भुवन शर्मा, रामनगर ब्लॉक अध्यक्ष देशबंधु रावत, मालधन ब्लॉक अध्यक्ष ओमप्रकाश, महिला कांग्रेस नगर अध्यक्ष ललिता उपाध्याय, बीना रावत, सतेश्वरी रावत, ममता आर्या, अनिल अग्रवाल, भुवन पांडेय, सुनीता देवी, गिरधारी लाल, अधिवक्ता अतुल अग्रवाल, सभासद अधिवक्ता विक्रम भट्ट, सभासद मोहम्मद अजमल सहित अनेक कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।



