रामनगर से उठी परिवर्तन की प्रचंड हुंकार! रणजीत सिंह रावत के गढ़ में जुटे दिग्गजों ने फूंका 2027 का चुनावी शंखनाद, भाजपा के दंभ को ढहाने का लिया महासंकल्प

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रामनगर से उठी परिवर्तन की प्रचंड हुंकार! रणजीत सिंह रावत के गढ़ में जुटे दिग्गजों ने फूंका 2027 का चुनावी शंखनाद, भाजपा के दंभ को ढहाने का लिया महासंकल्प

                       सलीम अहमद साहिल

 

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उत्तराखंड की देवभूमि में बदलाव की एक नई और बेहद ताकतवर बयार बहने लगी है, जिसका गवाह रामनगर की ऐतिहासिक धरती बनी है। रामनगर के एक निजी परिसर में जब कांग्रेस के ‘परिवर्तन संकल्प सम्मेलन’ का आगाज़ हुआ, तो वहाँ उमड़ा जनसैलाब और कार्यकर्ताओं का गगनभेदी जोश साफ बता रहा था कि जनता अब मौजूदा सत्ता के दमन और नाकामियों से पूरी तरह ऊब चुकी है। इस महासम्मेलन में सूबे की राजनीति के धुरंधर और कांग्रेस के शीर्ष सिपहसालारों ने एक मंच पर आकर भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों की धज्जियां उड़ा दीं।

 

 

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन मेहरा, प्रीतम सिंह और प्रकाश जोशी जैसे कद्दावर नेताओं की मौजूदगी ने इस आयोजन को एक बेहद दमदार और ऐतिहासिक शक्ति प्रदर्शन में तब्दील कर दिया, जिसने विरोधियों के खेमे में अभी से खलबली मचा दी है। इस पूरे महासंग्राम और परिवर्तन की गूंज के केंद्र में रहे रामनगर के जनप्रिय और धाकड़ नेता, पूर्व विधायक रंजीत रावत। इस सफल और विशाल सम्मेलन को धरातल पर उतारने में रणजीत रावत की कुशल रणनीति और क्षेत्र की जनता पर उनकी अटूट पकड़ साफ नजर आई। रणजीत रावत के इस अभेद्य गढ़ में जिस तरह का जन-सैलाब उमड़ा, उसने यह साबित कर दिया कि रामनगर की जनता अपने इस चहेते नेता के नेतृत्व में उत्तराखंड के सुनहरे भविष्य की इबारत लिखने को बेताब है।

 

 

मंच से लेकर जमीन तक, रंजीत रावत की तारीफ में उठती आवाजें और कार्यकर्ताओं का जोश यह बताने के लिए काफी था कि 2027 की सियासी जंग में वे कांग्रेस का सबसे मजबूत और कद्दावर चेहरा बनकर उभर रहे हैं, जिनकी अगुवाई में रामनगर ही नहीं बल्कि पूरे सूबे में कांग्रेस की सत्ता वापसी का मार्ग प्रशस्त होगा। रामनगर मे हुए परिवर्तन संकल्प सम्मेलन मे सेकड़ो की संख्या मे लोगो ने कांग्रेस का दामन थाम कर कांग्रेस को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

 

 

सम्मेलन के मंच से नेताओं ने उत्तराखंड के हक-हकूक और अस्मिता की आवाज को बेहद मुखर अंदाज में बुलंद किया। मीडिया से मुखातिब होते हुए नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार को हर मोर्चे पर नाकाम बताते हुए कहा कि सूबे में महंगाई और बेरोजगारी ने युवाओं की कमर तोड़ दी है। लगातार होते पेपर लीक के घोटालों ने उत्तराखंड के होनहार नौजवानों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है, जबकि बदहाल स्वास्थ्य और दम तोड़ती शिक्षा व्यवस्था से पहाड़ का आम नागरिक बेबस महसूस कर रहा है। उन्होंने रामनगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में लगातार बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि लोग रोज अपनी जान हथेली पर रखकर जीने को मजबूर हैं, लेकिन संवेदनहीन सरकार कुंभकर्णी नींद सोई हुई है। नेताओं ने दो टूक शब्दों में दावा किया कि प्रदेश की जनता अब इस तानाशाही और बदहाली को बर्दाश्त नहीं करेगी और 2027 में पूर्ण बहुमत के साथ कांग्रेस को सत्ता सौंपकर उत्तराखंड के स्वाभिमान की रक्षा करेगी।

 

 

 

वहीं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन मेहरा ने भी भाजपा के कुप्रबंधन पर तीखा प्रहार करते हुए साफ किया कि ‘परिवर्तन संकल्प यात्रा’ को मिल रहा यह अभूतपूर्व जनसमर्थन इस बात का प्रतीक है कि बदलाव की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। रामनगर के इस अंतिम पड़ाव पर उमड़ी यह ऐतिहासिक भीड़ भाजपा की विदाई का स्पष्ट संकेत है। कांग्रेस के भीतर किसी भी तरह के मतभेद या गुटबाजी की अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने भाजपा को अपने गिरेबान में झांकने की नसीहत दी, जहां वर्तमान और पूर्व दिग्गजों की अंतर्कलह अब सड़कों पर आ चुकी है। उन्होंने कांग्रेस को एक जीवंत और लोकतांत्रिक परिवार बताया जहां हर नेता और कार्यकर्ता, चाहे वह पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत हों या कोई अन्य वरिष्ठ साथी, सभी को पूरा सम्मान और सर्वोच्च स्थान हासिल है। कुल मिलाकर, रामनगर की इस पावन धरती से उठा यह इंकलाबी शंखनाद सिर्फ एक सम्मेलन नहीं, बल्कि उत्तराखंड के स्वर्णिम कल और कांग्रेस की गौरवशाली वापसी की वो अटूट प्रतिज्ञा है जिसे अब रोक पाना नामुमकिन है।

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