जसपुर के न्यू संगम ढाबे पर यात्रियों से सरेआम ‘डकैती’, परिवहन विभाग की सरपरस्ती में फल-फूल रहा अवैध वसूली का खेल
अज़हर मलिक
जसपुर स्थित न्यू संगम ढाबा इन दिनों यात्रियों के लिए सुविधा केंद्र नहीं, बल्कि सरेआम लूट का अड्डा बन चुका है, जहाँ उत्तराखंड परिवहन की बसों को रोककर यात्रियों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। ‘भोजन और विश्राम’ के नाम पर यहां जो खेल चल रहा है, उसने शासन-प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। हालत यह है कि ₹20 की पानी की बोतल ₹30 में बेची जा रही है और तंबाकू-सिगरेट समेत हर खाने-पीने की वस्तु पर एमआरपी (MRP) से कहीं अधिक दाम वसूले जा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर इन ढाबा संचालकों को ‘खुली लूट’ का सर्टिफिकेट किसने दिया है? क्या परिवहन विभाग के अधिकारियों और इस ढाबा मालिक के बीच कोई गुप्त ‘डील’ हो चुकी है, जिसके चलते रोडवेज चालक-परिचालक यात्रियों को जबरन इस ‘लूटघर’ तक पहुँचा रहे हैं? गुणवत्ता के नाम पर व्यवस्थाएं यहाँ शून्य हैं, लेकिन वसूली चरम पर है।
क्या खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें केवल कागजों पर निरीक्षण करती हैं या फिर भारी रसूख के चलते इस ढाबे की दहलीज लांघने की हिम्मत किसी अधिकारी में नहीं है? जिम्मेदार अधिकारी आखिर किस गहरी नींद में सोए हैं कि उन्हें जनता की चीखें सुनाई नहीं दे रहीं? यह महज महंगाई नहीं, बल्कि यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर की जा रही संगठित डकैती है। प्रशासन की चुप्पी यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या इस अवैध वसूली का हिस्सा ऊपर तक पहुँच रहा है, वरना अब तक इस ढाबे पर ताला क्यों नहीं जड़ा गया? जनता अब जवाब मांग रही है कि आखिर कब तक रसूखदारों के इशारे पर आम आदमी को इस तरह ठगा जाता रहेगा।


