जिला महिला अस्पताल में औचक निरीक्षण से खुलीं कई खामियां, कार्रवाई के संकेत, सीएमएस और डॉक्टरों की अनुपस्थिति से लेकर अल्ट्रासाउंड व्यवस्था और मरीजों की शिकायतों तक कई बिंदुओं पर उठे सवाल, DM स्तर से हो सकती है बड़ी कार्रवाई

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जिला महिला अस्पताल में औचक निरीक्षण से खुलीं कई खामियां, कार्रवाई के संकेत, सीएमएस और डॉक्टरों की अनुपस्थिति से लेकर अल्ट्रासाउंड व्यवस्था और मरीजों की शिकायतों तक कई बिंदुओं पर उठे सवाल, DM स्तर से हो सकती है बड़ी कार्रवाई

शानू कुमार ब्यूरो उत्तर प्रदेश 

बरेली: जिला महिला अस्पताल में सोमवार को प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम ने औचक निरीक्षण किया, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कई गंभीर खामियां सामने आईं। निरीक्षण के बाद पूरी रिपोर्ट जिलाधिकारी अविनाश सिंह को सौंप दी गई है, सूत्रों के अनुसार मामले में जल्द प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई हो सकती है।

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निरीक्षण के दौरान महिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. त्रिभुवन प्रसाद अनुपस्थित मिले। ड्यूटी रोस्टर के अनुसार तैनात गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. शमी और डॉ. मिनाक्षी भी मौके पर मौजूद नहीं मिलीं। इसके अलावा नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के कई कर्मचारी भी अनुपस्थित पाए गए, जिस पर अधिकारियों ने नाराजगी जताई।

 

 

वहीं अल्ट्रासाउंड कक्ष की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में रही। निरीक्षण टीम को मरीजों के आवागमन से संबंधित कोई वैध रजिस्टर नहीं मिला। मौके पर मौजूद अल्ट्रासाउंड नोडल डॉ. सी.पी. सिंह स्पष्ट जवाब नहीं दे सके, जिसके बाद संबंधित स्तर पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

 

 

 

वार्ड सहायक नीलम यादव के खिलाफ मरीजों से दुर्व्यवहार की शिकायतें भी सामने आईं। अधिकारियों ने इस मामले में भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं निरीक्षण में यह भी सामने आया कि अल्ट्रासाउंड कराने के लिए मरीजों को तीन महीने बाद की तारीख दी जा रही है, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

 

 

हेल्प डेस्क की शिकायत पंजिका में दर्ज शिकायतों के निस्तारण की स्थिति स्पष्ट नहीं मिली। अधिकारियों ने रिकॉर्ड व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

 

 

इमरजेंसी सेवाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली। मरीजों के आवागमन के लिए प्रवेश द्वार पर न तो स्ट्रेचर और व्हीलचेयर उपलब्ध थीं और न ही वार्ड सहायक एवं गार्ड तैनात मिले।

 

 

निरीक्षण के दौरान मरीजों ने भी कई समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। एक महिला मरीज ने बताया कि आवश्यक पैथोलॉजी जांच अस्पताल में नहीं हो रही, जिसके चलते बाहर से जांच कराने पर लगभग 1700 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं दूसरी मरीज ने आरोप लगाया कि अस्पताल में प्रोजेस्ट्रोन इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें बाहर से इंजेक्शन लगवाने पड़े।

 

 

 

जानकारी के मुताबिक प्रशासनिक टीम ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है। स्वास्थ्य सेवाओं में मिली अनियमितताओं को लेकर अब आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

 

 

निरीक्षण अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) पूर्णिमा सिंह के नेतृत्व में किया गया। टीम में उप जिलाधिकारी (न्यायिक) मीरगंज निधि डोडवाल, अपर उपजिलाधिकारी (सदर) मल्लिका नैन, जिला प्रोबेशन अधिकारी मोनिका राना और सहायक निदेशक मत्स्य गायत्री पाण्डेय शामिल रहीं।

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