दोषी सनराइज अस्पताल पर कार्रवाई क्यों रुकी? CMO डॉ. विश्राम सिंह, डिप्टी CMO डॉ. लईक अहमद की भूमिका संदिग्ध, आयुष्मान नोडल अधिकारी डॉ राकेश की रिपोर्ट में दोषी है अस्पताल, लेकिन डॉ लईक अहमद और सीएमओ डॉ विश्राम सिंह नहीं कर रहे कार्रवाई, शुरुआती जांच में डॉ लईक अहमद को सीएमओ ने किया था बोर्ड में शामिल
शानू कुमार ब्यूरो उत्तर प्रदेश
बरेली : बरेली में सनराइज अस्पताल से जुड़ा मामला अब एक मरीज की मौत से आगे बढ़कर पूरे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बन गया है। जांच में अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही, नियमों की अनदेखी और आयुष्मान योजना के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप सामने आने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना कई तरह की शंकाओं को जन्म दे रहा है।
इस पूरे प्रकरण में CMO डॉ. विश्राम सिंह, डिप्टी CMO डॉ. लईक अहमद की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। जिम्मेदारी के पदों पर बैठे इन अधिकारियों की निगरानी में ही यह पूरा मामला घटित हुआ, लेकिन कार्रवाई के स्तर पर अब तक ठोस कदम न उठाया जाना सिस्टम की मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है।
मामला आयुष्मान योजना के एक मरीज से जुड़ा है, जिसे गंभीर स्थिति में सनराइज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अस्पताल ने इलाज के नाम पर पैसे वसूले। इतना ही नहीं, जिस बीमारी के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर की जरूरत थी, वहां बिना विशेषज्ञ के ही इलाज चलता रहा।
जांच में सामने आया कि अस्पताल में जरूरी विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं थे, इसके बावजूद मरीज को भर्ती कर इलाज किया गया। आरोप यह भी है कि मरीज को वेंटिलेटर पर रखने से पहले परिजनों की स्पष्ट सहमति नहीं ली गई। इलाज के दौरान लगातार लापरवाही बरती गई और कुछ ही दिनों में मरीज की मौत हो गई।
घटना के बाद परिजनों ने विरोध प्रदर्शन किया और न्याय की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। मामला तूल पकड़ने के बाद प्रशासन हरकत में आया और जांच बैठाई गई। जांच रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधन की खामियां उजागर होने के बावजूद अब तक कार्रवाई न होना सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
सबसे अहम सवाल यही है कि जब जांच में अस्पताल की गलती सामने आ चुकी है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर किसी तरह का दबाव है, या फिर जानबूझकर मामले को लंबित रखा जा रहा है? CMO डॉ. विश्राम सिंह, डिप्टी CMO डॉ. लईक अहमद की भूमिका को लेकर भी अब पारदर्शिता की मांग उठने लगी है। स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही तय किए बिना इस तरह के मामलों पर रोक लगाना मुश्किल माना जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि जब आयुष्मान के नोडल अधिकारी डॉ राकेश सिंह की रिपोर्ट में अस्पताल दोषी है तो बड़ी कार्रवाई सीएमओ ने क्यों नहीं की। डॉ राकेश सिंह अपनी रिपोर्ट शासन को भी भेज चुके हैं।
फिलहाल प्रशासन की ओर से सिर्फ आश्वासन दिया गया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन जिस तरह से मामला लंबित पड़ा है, उससे यह सवाल और भी गहरा हो गया है कि आखिर दोषियों पर कार्रवाई कब होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।



