महा-स्कैम या गजब का संयोग? 50 अफसरों ने एक ही दिन खरीदी जमीन, फिर 3200 करोड़ के प्रोजेक्ट से 11 गुना बढ़ गई कीमत!
नौकरशाही के गलियारों से ‘इनसाइडर ट्रेडिंग’ और वीआईपी निवेश का एक ऐसा हैरतअंगेज मामला सामने आया है, जिसने देश के सबसे बड़े दिमागों की ‘फ्यूचर प्लानिंग’ पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्य प्रदेश के कोलार क्षेत्र के एक शांत से गांव ‘गुराड़ी घाट’ में देश के करीब 50 रसूखदार आईएएस और आईपीएस अफसरों ने मिलकर एक ही दिन (4 अप्रैल 2022) को करीब 5.5 करोड़ रुपये में 5 एकड़ कृषि भूमि की रजिस्ट्री कराई। अचल संपत्ति विवरण (IPR) में इस अनूठे निवेश को बड़े ही सलीके से ‘like-minded officers’ (एक जैसी सोच वाले अधिकारी) की संपत्ति बताया गया। लेकिन असली खेल इस रजिस्ट्री के बाद शुरू हुआ। जमीन खरीदने के ठीक 16 महीने बाद सरकार इस क्षेत्र के लिए 3200 करोड़ रुपये का ‘वेस्टर्न बायपास’ मंजूर कर देती है, जो इत्तेफाक से अफसरों की इसी जमीन से महज 500 मीटर की दूरी से गुजरना था।
प्रोजेक्ट पास होते ही मास्टरस्ट्रोक का अगला हफ्ता आया और जून 2024 में इस खेती की जमीन का लैंड यूज (भूमिका उपयोग) रातों-रात बदलकर ‘आवासीय’ यानी रेजिडेंशियल कर दिया गया। इस जादुई प्रशासनिक तालमेल का नतीजा यह हुआ कि जो जमीन कभी महज ₹81 प्रति वर्गफीट के भाव से खरीदी गई थी, वह डायवर्जन के बाद ₹557 और आज के बाजार भाव में ₹2500 से ₹3000 प्रति वर्गफीट के आसमान को छू रही है। यानी जो संपत्ति कुछ साल पहले करीब 5.5 करोड़ की थी, उसकी कीमत आज 11 गुना बढ़कर ₹65 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। मजेदार बात यह है कि बिना किसी रजिस्टर्ड सोसायटी या टाउनशिप प्लानिंग के हुआ यह ‘प्रीमियम इन्वेस्टमेंट’ अब चर्चाओं में है कि क्या यह सिर्फ इन अफसरों की बेहतरीन किस्मत थी या फिर सरकारी फाइलों के मूवमेंट की वो ‘इनसाइड इन्फॉर्मेशन’, जिसने चंद महीनों में ही इन अफसरों को अरबपति बना दिया।



